Monday, November 16, 2009 05:01 [IST]  

danik bhaskarशक्कर, दाल सब हुए महंगे

भास्कर न्यूज

रायगढ़. प्रति वर्ष करीब 20-30 फीसदी महंगाई से जहां निम्न व मध्यम वर्ग की थालियों से मीठा व साग-सब्जियां गायब होती जा रहीं हैं। आलम यह है कि राशन का कोई भी सामान इनके बजट में नहीं समा रहा है।



शहर की जनता की मानें तो बढ़ती महंगाई ने उनके मासिक बजट को बिगाड़ा है वहीं राशन सामग्री पिछले डेढ़ साल में ही लगभग दुगुनी महंगी हो गई है। राशन दुकान संचालक दीपक होता ने बताया कि विगत 4 माह में राशन सामग्री के दामों पर एक नजर डालें तो शक्कर 30, आलू 40, प्याज 30, दालें 20, घी 30, डालडा 15 तो तेल 10 फीसदी महंगा हो गया है।



ऐसे में जहां मध्यम वर्गीय परिवारों का मासिक राशन बजट भी 25 से 30 प्रतिशत और बढ़ गया है। थोक विक्रेताओं का कहना है कि राशन के सामानों की दरों में आगे भी कमी होने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं। वहीं इस साल मौसम की मार ने भी प्रदेश में फसल सहित आलू-प्याल व सब्जियों के उत्पादन पर काफी असर डाला है।



ग्राहकों के अनुसार राशन सामग्री में प्रतिमाह बढ़त होती है लेकिन मध्यम व निमA वर्ग की मासिक आय वहीं की वहीं रहती है ऐसे में लोग अपने शौक छोड़ रोजमर्रा की जरूरतों को भी पूरा करने में तकलीफ महसूस कर रहे हैं। जहां सरकार निम्न वर्ग को एक व दो रुपए किलो में चावल मुहैय्या करा रही है लेकिन मध्यम वर्ग को कोई विशेष लाभ मिलता नहीं। दूसरी ओर उच्च वर्ग को राशन की इस बढ़ती महंगाई से कोई वास्ता नहीं है ऐसे में इस बढ़ती महंगाई का मध्यम वर्ग पर ही व्यापक असर पड़ रहा है।
लोगांे का कहना है कि लगातार महंगाई बढ़ने से अब लोग भविष्य को देखते हुए बचत भी नहीं कर पा रहे हैं। केंद्र सरकार ने भी महंगाई पर लगाम कसने की बात कहीं थी। लेकिन वह भी नाकाफी साबित हुई, ऐसे में दिनोंदिन सूरसा का रूप धारण कर रही महंगाई से राहत पाने फिलहाल कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा।

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