Monday, November 16, 2009 05:01 [IST]  

danik bhaskarयहां चेतावनी, वहां समझौता

भास्कर न्यूज

श्रीगंगानगर. आईजीएनपी के प्रथम चरण में छह बारियों की मांग को लेकर किसान मजदूर व्यापारी संघर्ष समिति 26 व 27 नवंबर को 48 घंटे तक चक्का जाम करेगी। रविवार को पंचायती धर्मशाला में प्रेस कांफ्रेंस में संघर्ष समिति के अगुआ नेता पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल व अनूपगढ़ के विधायक पवन दुग्गल ने सरकार पर जानबूझ कर प्रथम चरण को पर्याप्त सिंचाई पानी नहीं देने का आरोप लगाया।



बेनीवाल का आरोप था कि सरकार बांध खाली होने, महज दो पूरी बारियां पानी मिलने व तीसरी बारी बरसात आने पर ही मिलने की संभावना का भ्रामक प्रचार कर रही है। प्रथम चरण में 150 क्यूसेक की जलदाय योजनाएं हैं। द्वितीय चरण की जलदाय योजनाओं की क्षमता 2300 क्यूसेक है। द्वितीय चरण में पेयजल योजनाओं को पाइपों की बजाय लंबी-लंबी नहरों से पानी दिया जा रहा है।



इससे पानी का अपव्यय हो रहा है। दोनों चरणों का पेयजल रिजर्व रखने से प्रथम चरण को 58 की बजाय 25 प्रतिशत पानी मिल पाता है। द्वितीय चरण में 42 की बजाय 75 प्रतिशत पानी चलाया जाता है। इससे प्रथम चरण बर्बादी के कगार पर खड़ा है। बेनीवाल के अनुसार सरकार मोघे दुरुस्त कर पानी बचानेके नाम पर किसानों का ध्यान बंटा रही हैं।



आईजीएनपी क्षेत्र में पूरा पानी न उपलब्ध होने तक किसान मोघों को छेड़ने नहीं देंगे। विधायक पवन दुग्गल ने बताया कि पहले पांच नवंबर को छह बारियों के लिए एक दिन तक चक्का जाम किया था। अब 26-27 नवंबर को 48 घंटे तक चक्का जाम किया जाएगा। विधायक दुग्गल ने बताया कि चक्का जाम को सफल बनाने के लिए प्रथम चरण में संघर्ष समिति की चार टीमें किसानों से जनसंपर्क कर रही हैं।



किसान वर्ग भी पानी के लिए सरकार के खिलाफ लामबंद हो रहा है। दुग्गल ने बताया कि 17 नवंबर को अनूपगढ़ में बैठक में चक्का जाम की तैयारियों पर चर्चा की जाएगी। नरेगा संबंधी समस्याओं को लेकर महिलाएं 19 नवंबर को घड़साना में एसडीएम का घेराव करेंगी। प्रेस कांफ्रेंस में माकपा के एडवोकेट चरणदास कंबोज भी उपस्थित थे।

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