Friday, Nov 20th, 2009, 8:48 am [IST]  

danik bhaskarडर के कारण 60 फीसदी शिक्षाकर्मी काम पर लौटे

Bhaskar News

दुर्ग. संविलियन व छठवें वेतनमान की मांग को लेकर पिछले बारह दिनों से आंदोलनरत शिक्षा कर्मियों को सरकार ने सेवा समाप्ति का अल्टीमेटम देकर परेशानी में डाल दिया है। उन्हें अब बगैर मांग पूर्ण हुए वापस लौटना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के तेवर ने शिक्षा कर्मियों के होश उड़ा दिए हैं।



नौकरी जाने के डर से नए शिक्षा कर्मियों ने आंदोलन से मुंह मोड़ लिया है जबकि पुराने व नियमित शिक्षाकर्मी भी धीरे-धीरे आंदोलन स्थल से खिसकने लगे हैं।रविवार को शिक्षाकर्मी संघ के दो गुटों द्वारा मुख्यालय में किए जा रहे धरना आंदोलन में सिर्फ गिनती के ही शिक्षाकर्मी नजर आए। शालेय शिक्षाकर्मी संघ के बैनर तले किए जा रहे धरना में एक भी शिक्षाकर्मी दोपहर के बाद नहीं दिखे।



जिला पंचायत के सीईओ एस प्रकाश से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में अब तक करीब 11 हजार शिक्षाकर्मी वापस लौट चुके हैं। शनिवार को दुर्ग ब्लाक के 303, धमधा 972, पाटन 397, गुंडरदेही 785, बेमेतरा 510, बेरला 390, साजा 372, नवागढ़ 603, बालोद 190, गुरुर 183, डौंडी 435 एवं डौंडीलोहारा ब्लाक के 579 शिक्षाकर्मी वापस लौटे। इसी तरह गुंडरदेही में लगभग 100 व डौंडीलोहारा में 150 शिक्षा कर्मियों को छोड़कर शेष सभी शिक्षाकर्मी अपने कार्य पर उपस्थित हो चुके हैं।



शिक्षाकर्मी संघ के ब्लाक अध्यक्ष शत्रुहन सिंह साहू का कहना है कि आंदोलन आज भी जारी रहा और बड़ी संख्या में शिक्षाकर्मी धरना में शामिल हुए। 17 नवंबर को राजधानी में रैली निकाली जाएगी। जिसमें जिले से बड़ी संख्या में शिक्षाकर्मी शामिल होंगे।

धरना में किशन देशमुख, उमाशंकर साहू, मुक्तावन दास भारती, वेदनारायण, कृष्णकुमार सोनकर, दिनेश शर्मा, गिरिजा दुबे, योगिता चंद्राकर, पुष्पांजलि, भेमराज देवांगन, विनोद सिन्हा, सरस्वती देवांगन, चंपालाल पारधी, डीएस डहरे, गिरीश वर्मा, रेखा देवांगन, ममता मौर्य, दिनेश प्रसाद अहीर, ललिता ठाकुर, उषा चंद्रवंशी, विनिता दुबे, मंशाराम लहरे, दानीराम साहू, योगेंद्र देवांगन, मनीष देशमुख, आरके देशमुख, देवधर साहू शामिल हुए।



शालेय शिक्षाकर्मी संघ के बैनर तले रहे धरना में जिला अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी, कैलाशपति मिश्रा, किशोर ठाकुर, लीलेश्वर देशमुख, शैलेष ठाकुर, उमेश ठाकुर, रंजना यादव, दयालू राम बघेल, ओमप्रकाश, बसंत नेताम शामिल हुए।

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विचार:

अजय साहू

Monday, 16th Nov 2009, 11:04
शिक्षाकर्मियों को सरकारों ने भिक्षा कर्मी बना दिया है, अजीत जोगी जी के शासन काल में रमन सिंह जी जख्‍मों पर मरहम लगाने गए थे, लॉलीपाप भी पकड़ाया लेकिन सत्‍ता का मद सारे वायदे भूला देता है, रमन जी भी उसी तानाशाही रवैये को अपना रहे हैं जिसके कारण जोगी जी से सत्‍ता सुंदरी रूठ गई थी, रमन सरकार से आशा है किवह इन निरीह युवाओं को धैर्य की परीक्षा नही लेगी और जल्‍दी ही इनकी मांगो पर सहानुभूति पूर्वक विचार कर कुछ निर्णय लेगी

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