एक्टीविटी बेस्ड होगी मार्किग
भीलवाड़ा. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सैकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने नौवीं कक्षा के मार्किग पैटर्न में बदलाव करते हुए एक्टीविटी बेस्ड मार्किग लागू कर दी है। अब बच्चों को रटने और कॉपियों में लिखने से ही नंबर नहीं मिलेंगे। बच्चों को स्कूल में सिखाए गए चैप्टर व नैतिक शिक्षा को रोज के जीवन में भी अपनाना होगा।
सीबीएसई द्वारा स्कूलों में भेजे गए निर्देशों में कहा गया है कि 60 प्रतिशत पेपर-पेन मोड (लिखित परीक्षा) व 40 प्रतिशत अंक बच्चों की आदतों को देखते हुए दिए जाएंगे। मार्किग का यह नया पैटर्न इस सत्र में नौवीं कक्षा में लागू होगा। इसके बाद दसवीं में यह सिस्टम लागू करने की मंशा सीबीएसई की है। एवरग्रीन स्कूल के सीईओ नागपाल सिंह ने बताया कि पेपर्स को भी दो हिस्सों में विभाजित किया गया है।
40 प्रतिशत अंक बच्चों की योग्यता को ध्यान में रखकर स्कूल मैनेजमेंट द्वारा दिए जाएंगे। आमतौर पर बच्चे शिक्षा को जीवन में अपना नहीं पाते। बच्चों का लाइफ के प्रति एटीट्यूट सुधारने और ज्ञान जीवन में अपनाने के लिए यह व्यवस्था की गई है। सीबीएसई ने इसे फोरमेटिव एसेस्समेंट का नाम दिया है। बच्चों की योग्यता का पता स्कूल में आयोजित होने वाले कार्यक्रम, डिबेट, वर्कशॉप, सेमिनार, कंपीटिशन आदि के जरिए किया जाएगा।
हकीकत में होता क्या है
आज बच्चों को यह तो शिक्षा दी जाती है कि झूठ बोलना अच्छी बात नहीं है, पर आमतौर पर बच्चे होमवर्क नहीं करने और स्कूल नहीं आने के लिए झूठे बहाने बनाते हैं। इसी प्रकार एक्सीडेंट होने पर दूसरों की मदद करनी चाहिए। पर एक्सीडेंट को देखकर बच्चे पीड़ित व्यक्ति की मदद नहीं करते। स्कूल में सीखी गई बातों को जीवन में क्रियान्वित करने के लिए यह नया सिस्टम लागू किया गया है।










