बस्तर जाने वालों को 20 तक मिली राहत
बिलासपुर. स्थानांतरण में नक्सली क्षेत्रों में जाने वाले थानेदारों को 20 नवंबर तक राहत मिल गई है। डीजी छुट्टी पर हैं। छुट्टी से लौटने के बाद वे रिलीव आर्डर जारी कर देंगे। सूची में नाम का पता चलते ही कई थानेदारों ने तबादला रुकवाने के लिए मंत्रालय का चक्कर काटना शुरू कर दिया है।
जिले के जिन सात थानेदारों का तबादला बस्तर सहित नक्सली क्षेत्रों में किया गया है, उनकी नींद हराम हो गई है। सभी अपने आकाओं को मनाने में जुट गए हैं। इनमें से कोई भी तबादले पर जाना नहीं चाहता, पर अनुशासन की गाज का डर भी है। डीजीपी विश्वरंजन 20 नवंबर को छुट्टी से लौट आएंगे।
इसके बाद सभी थानेदारों को रिलीव कर दिया जाएगा। जैसे-जैसे समय नजदीक आते जा रहा है, थानेदारों की धड़कनें तेज होने लगी हैं। उन्होंने तबादला रुकवाने के लिए कोशिशें भी तेज कर दी हैं। मंत्रालय में बैठे आला अधिकारियों से हर थानेदार संपर्क में हैं। कई हर रोज रायपुर आना-जाना कर रहे हैं।
थानेदारों में आधे से अधिक अधेड़ हैं और कुछ साल तक बस्तर में रह भी चुके हैं। ऐसे थानेदार इसी बात का हवाला दे रहे हैं। ऑपरेशन ग्रीन हंट में भेजने के लिए पहले तय हुआ था कि सभी जवानों को बस्तर के नक्सली इलाके में 6-6 माह के लिए भेजा जाएगा। इसके लिए उनकी सूची भी बन चुकी थी। विभाग के इस आदेश का पालन करने में किसी को खास तकलीफ नहीं थी, क्योंकि 6 माह बाद वापसी की उम्मीद थी, लेकिन अब इन थानेदारों का स्थाई तबादला नक्सली क्षेत्रों में कर देने से उनकी पीड़ा बढ़ गई है। स्थानांतरण सूची जारी होने के बाद डीजी दिल्ली चले गए। अब उनके आने के बाद ही तय होगा कि कौन जा रहा है और कौन नहीं जा रहा।










