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Monday, November 16, 2009 06:14 [IST]  

danik bhaskarअब केयू रहेगा हरा-भरा

विकास बत्तान

kurukshetraकुरुक्षेत्र. दुनिया भर की यूनिवर्सिटी में अपने सुंदर और हरे-भरे कैंपस से एक अलग पहचान बनाने वाली कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी हमेशा इसी तरह हरी-भरी रहेगी। कहीं केयू भी कंकरीट के जंगल में तब्दील न हो जाए इसके लिए केयू प्रशासन ने एक अहम फैसले पर मुहर लगाई है।



जिसके चलते केयू कैंपस में 40 एकड़ भूमि को केवल पेड़-पौधों और वन्य प्राणियों के लिए संरक्षित कर दिया गया है। केयू प्रशासन की मानें तो देशभर में केयू पहली यूनिवर्सिटी है जिसने पर्यावरण के लिए इतनी जगह संरक्षित करने का फैसला लिया है।



क्यों पड़ी जरूरत



एक तरफ जहां हरे-भरे खेतों में कालोनियां कटकर कंकरीट के मकान बन रहे हैं वहीं केयू में भी आधुनिक समय में कई नए कोर्स शुरू होने के चलते विभागों की संख्या बढ़ रही है। इन विभागों के लिए प्रत्येक वर्ष कई एकड़ भूमि में भवन निर्माण का कार्य होता है।



विद्यार्थियों की साल दर साल बढ़ती तादाद के चलते भी केयू के हरे-भरे कैंपस से पेड़ लगातार कम हो रहे थे। केयू ने अपने सुंदर कैंपस को सहेजने के लिए ४क् एकड़ भूमि में कभी भी कोई भवन निर्माण नहीं करने का निर्णय लिया।



प्रो. तंवर ने बताया कि केयू कैंपस अपनी सुंदरता और हरियाली से विश्वभर में सराहा जाता है। वे चाहते थे केयू कैंपस इसी तरह हरियाली से सराबोर रहे और लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। यह प्रपोजल बड़े दिल से तैयार किया गया है। इससे प्रो. तंवर बचपन से उनका यूनिवर्सिटी से जुड़ा होना मानते हैं।



वन्य प्राणियों को दिया तोहफा



केयू की इस पहल से वन्य प्राणियों को भी तोहफा मिला है। केयू के रजिस्ट्रार प्रो. राघवेंद्र तंवर ने बताया कि केयू कैंपस में विभिन्न प्रकार के पक्षियों ने अपना डेरा बनाया हुआ है। लेकिन घटती पेड़ों की संख्या के चलते कहीं ये पक्षी अपना आशियाना बाहर खोजना न शुरू कर दें इसलिए भी यह कदम उठाया गया है।



क्रांतिकारी कदम



पर्यावरण विशेषज्ञ डा. जेएस यादव का कहना है कि यह कदम कुरुक्षेत्र के पर्यावरण के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है। डा. यादव ने बताया कि केयू कैंपस इकलौती ऐसी जगह है जहां पर कोयल की सातों प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा मोरों को भी इस क्षेत्र में संरक्षण मिलेगा। डा. जेएस यादव ने बताया कि पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी यह फैसला बहुत लाभदायक साबित होगा।



बड़ी भावुकता है जुड़ी

केयू के रजिस्ट्रार प्रो. राघवेंद्र तंवर बताते हैं कि इस प्रपोजल से सभी सदस्यों की भावुकता जुड़ी थी। इस प्रपोजल को कार्यकारिणी परिषद में रखने से पहले इस रकबे के पर्यावरण के लिए सहेजने के फायदे भी गिनाए गए। प्रो. तंवर मानते हैं कि पर्यावरण को सुरक्षित बनाने की दिशा में यह कदम एक सार्थक प्रयास साबित होगा।



उन्होंने कहा कि केयू इकलौती ऐसी यूनिवर्सिटी है जिसने पर्यावरण को सहेजने के बारे में न केवल सोचा बल्कि अपनी सोच को साकार रूप भी दिया। प्रो. तंवर मानते हैं कि इसके बाद आने वाली पीढ़ियां भी दुर्लभ वन्य पक्षियों को केयू कैंपस में देख पाएंगी।

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