मानदण्डों से मेल नहीं खाता केन्द्रीय एक्ट
बीकानेर. केन्द्र सरकार ने 2 से 16 वर्ष की आयु के बालकों के लिए मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा ए़क्ट लागू कर दिया है। राज्य सरकार को भी यह एक्ट क्रियान्वित करना होगा लेकिन यह शिक्षक समानीकरण के लिए तय किए मानदण्डों से मेल नहीं खाता।
राज्यों में भी यह लागू होगा क्योंकि केन्द्रीय सरकार द्वारा राज्य को सर्व शिक्षा अभियान के तहत धन उपलब्ध करवाया जा रहा है। संसद से पारित यह एक्ट ‘दी राइट ऑफ चिल्ड्रन टू फ्री एण्ड कम्पलसरी एज्यूकेशन एक्ट 2009’ भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुआ है।
इस एक्ट के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा एक से पांच के लिए 30 बालकों पर एक शिक्षक लगाना होगा जबकि राजस्थान के शिक्षा विभाग में 50 से 99 विद्यार्थियों पर केवल दो शिक्षक तथा अतिरिक्त 50 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक और नियुक्त करने का प्रावधान है। एक्ट में वर्णित अनुसूची के अनुसार कक्षा एक से पांच तक के प्राथमिक विद्यालय में साठ बालकों पर दो शिक्षक, 61 से 90 बालकों पर तीन शिक्षक, 91 से 120 तक चार व 121 से 200 बालकों के विद्यालयों में 5 शिक्षक लगाने का प्रावधान किया गया है। प्राथमिक विद्यालयों में 150 से अधिक बालक होने पर पांच शिक्षकों के साथ एक प्रधानाध्यापक का भी प्रावधान रखा गया है।
एक्ट में कक्षा 6, 7 व 8 प्रत्येक के लिए एक-एक शिक्षक और इनमें भी भाषा, गणित, विज्ञान व सामाजिक विज्ञान के शिक्षक रखने का प्रावधान किया गया है। सात अध्याय के इस एक्ट में शिक्षा से वंचित बालकों को विद्यालय से जोड़ना, प्रवेश के लिए आयु प्रमाण पत्र, शिक्षकों की योग्यता आदि के साथ ही छात्र शिक्षक अनुपात का विवरण भी दिया गया है। केन्द्रीय एक्ट में छह माह में छात्र-शिक्षक अनुपात निर्धारित करने का प्रावधान भी रखा गया है।
देश में लागू हुआ एक्ट राजस्थान में भी मान्य होगा। राज्य सरकार इसके अनुरूप प्रारम्भिक शिक्षा में पद सृजित करे।
महेन्द्र पाण्डे, महामंत्री प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ










