कबाड़ में विस्फोट, तीन मरे
कोटा. महात्मा गांधी कॉलोनी मुख्य रोड पर रविवार सुबह लोहे की वस्तु को पीटते समय जबर्दस्त विस्फोट हो गया। इसके चलते लुहार, उसके बेटे और कबाड़ी के चिथड़े उड़ गए। लोहे की वस्तु कबाड़ी लेकर आया था और लुहार उसे गर्म करके पीट रहा था।
लोहे की वस्तु से निकले र्छे और टुकड़े आसपास खड़े और वहां से गुजर रहे लोगों के शरीर में घुस गए। इसके चलते 8 लोग घायल हो गए, इनमें 6 बच्चे शामिल हैं। पुलिस व एफएसएल के वैज्ञानिक विस्फोटक पदार्थ की जांच में जुटे हैं।
एएसपी लक्ष्मण गौड़ के अनुसार सेना व रेलवे क्षेत्र से जुड़ी महात्मा गांधी कॉलोनी में सड़क के किनारे गाड़िया लुहार मन्ना, उसकी पत्नी मेमबाई व 5 वर्षीय बेटा कमल भट्टी जलाकर काम कर रहे थे। उसी समय कबाड़ का काम करने वाला भीमगंजमंडी निवासी गिर्राज लुहार ठेला लेकर वहां पहुंचा। मेमबाई के अनुसार गिर्राज उसका भाई लगता है। गिर्राज ने सड़क के दूसरी तरफ ठेला खड़ा किया और कुछ सामान लेकर मन्ना के पास पहुंचा। उसने मन्ना को वह वस्तु गर्म करने के लिए दी।
सुबह करीब 9:50 बजे मन्ना ने वह वस्तु भट्टी में गर्म की। गिर्राज उसके सामने ही बैठ गया और कमल मन्ना के एक तरफ बैठा था। उसकी पत्नी मन्ना पीछे के खड़ी थी। जैसे ही मन्ना ने वह वस्तु गर्म करने के बाद उस पर हथौड़ा (घन) चलाया तेज धमाका हुआ और चीख पुकार मच गई। लोगों ने धमाके की दिशा में देखा तो मन्ना, गिर्राज व कमल के शरीर 15 फीट ऊपर हवा में उछले और फिर सड़क पर गिरे। तीनों के शरीर मांस के लोथड़ों में बदल चुके थे। उनके अंग व खून काफी दूर तक बिखर गया था। आसपास की दुकानों पर खड़े लोग और मौके पर मौजूद बच्चों के शरीर में र्छे और लोहे के टुकड़े धंस गए। धमाके के बाद अफरा—तफरी मच गई।
ये हुए घायल
मन्ना लुहार की पत्नी मेमबाई, घर से सामान खरीदने बाजार जा रहे उसी कॉलोनी का माहिर पुत्र मोहम्मद शरीफ, पास की दुकान पर साइकिल मंे हवा भरवाने आए राकेश बैरवा, कुलदीप गुर्जर, श्यामवीर गुर्जर, उसका छोटा भाई सुरजीत व मनीष तथा सामने दूध डेयरी पर खड़े भूपेन्द्र गुर्जर उर्फ बबलू घायल हो गए। इनमंे से राकेश की हालत गंभीर बनी हुई है। सभी घायलों को महाराव भीमसिंह चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है।
क्या था विस्फोटक पदार्थ
विस्फोट किसमें हुआ और वह पदार्थ क्या था, इस बारे में पुलिस व एफएसएल के वैज्ञानिक पुख्ता तौर पर कुछ भी नहीं बता पाए। एएसपी लक्ष्मण गौड़ के अनुसार मौके से कुछ आर्टिकल्स बरामद किए गए। जो ग्रे, सिल्वर व ब्राउन कलर के हैं। इन्हें जांच के लिए एफएसएल भेजा जा रहा है। उसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। यह तो तय है कि विस्फोट जिस भी वस्तु में हुआ, वह काफी पावरफुल थी। जो साधारण आदमी के पास नहीं हो सकती। गिर्राज उस वस्तु को कहां से खरीदकर लाया था अथवा वह कबाड़ उसे किसने बेचा था, इसकी जांच की जा रही है।
कबाड़ी के हाथ—पैर अलग हो गए शवों को चद्दर में गठरी की तरह ले जाया गया कुछ ही देर में पुलिस अधिकारी व ईएमआरआई की एंबुलेंस भी आ गई और घायलों को लेकर महाराव भीमसिंह चिकित्सालय पहुंची। मन्ना व कमल के शवों को चद्दर में गठरी की तरह ले जाया गया। गिर्राज की सांसें चल रही थी, लेकिन उसके हाथ व पैर अलग हो चुके थे। अस्पताल पहुंचते—पहुंचते उसने भी दम तोड़ दिया।
150 फीट दूर मिला हथौड़ा
मन्ना के हाथ में जो चार—पांच किलो का हथोड़ा था वह उछलकर करीब 150 फीट दूर दूसरी लाइन में रहने वाले कैलाशचंद के मकान की दूसरी मंजिल पर गिरा। जिससे छत पर गड्ढ़ा हो गया।
बड़ा हादसा हो सकता था
विस्फोटक इतना जबरदस्त था कि उससे तीनों व्यक्तियों के परखच्चे उड़ गए। एफएसएल के विशेषज्ञों का कहना है विस्फोट का सारा प्रेशर तीनों से टकराया और वे उड़ गए। उसके बाद भी उसके र्छे 20 फीट दूर दुकानों के शटर से टकराए तो वहां सुराख बना दिए। यदि तीनों आसपास नहीं होते तो इसका प्रेशर करीब 50 फीट से अधिक के दायरे में फैलता और ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ सकते थे। रविवार का दिन होने के कारण वहां अन्य दिनों की अपेक्षा आवाजाही भी कम थी।










