फतहसागर में दो हजार कूट्स दिखे
उदयपुर. जाड़ों में सेंट्रल यूरोप, साइबेरिया, मंगोलिया, हिमालय व उत्तरी भारतीय क्षेत्रों से उदयपुर को रूख करने वाले परिंदों को इस बार पीछोला की बजाय फतहसागर में अठखेलियां करना अधिक सुहा रहा है।
पिछले साल जहां फतहसागर में सुदूर हिमालय के पंछी कूट्स की संख्या मात्र 110 थी, वहीं इस बार ये करीब दो हजार की तादाद में नजर आए हैं। दो सालों की तुलना में जहां पीछोला में मेहमान पखेरुओं की संख्या में बहुत ज्यादा गिरावट नोटिस की जा रही है, वहीं फतहसागर में पंछियों की तादाद गत वर्षो की तुलना में बढ़ना सुकूनदायी है।
12 नवंबर को मशहूर पक्षीविद् डॉ. सालीम अली के जन्मदिवस के उपलक्ष में हर साल पीछोला, फतहसागर सहित अन्य महत्वपूर्ण पक्षी प्रवास क्षेत्रों में गिनती व बर्ड वाचिंग की जाती है। पर्यावरणविद् डॉ. रजा तहसीन एवं डॉ. सतीश शर्मा के निर्देशन में वरिष्ठ सांइस टीचर मोहम्मद यासीन, बीएन कॉलेज के प्राणीशास्त्र के व्याख्याता डा. अभिमन्युसिंह, रिसर्च स्कॉलर विजय व बायोटैक छात्र दिलीप माली ने रविवार को पीछोला व फतहसागर में प्रवासी पंछियों की गिनती की।
गौरतलब है कि पक्षियों पर अध्ययन करने वाली राष्ट्रीय एजेंसी बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी ने देशभर के महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्रों में पीछोला को भी शुमार किया है जबकि फतहसागर प्रस्तावित साइट्स में है।
विसलिंग टील्स पहली बार
बर्ड वाचिंग के दौरान टीम ने फतहसागर में लार्ज विसलिंग टील्स के 20 जोड़े देखे जो पिछले सालों में यहां कभी नहीं आए। इसी तरह 22 कॉम्बो डक, ब्राहमनी डक का एक जोड़ा, गढ़वाल के 7 जोड़े नजर आए। पिछले साल यहां गढ़वाल की संख्या 138 रिकार्ड की गई थी। पीछोला में 740 कूट्स गिने जबकि पिछले साल इनकी तादाद करीब साढ़े तीन हजार थी।
सेंट्रल यूरोप व कनाड़ा से आने वाले ब्राहमनी डक यानी चकवा—चकवी के सात जोड़े दीखे जबकि स्थानीय प्रवासी पक्षी नकटा के भी 7 जोड़े आए। साइबेरिया के नॉर्थ पिनटेल का एक जोड़ा, गढ़वाल के तीन जोड़े, पर्पल मूर हेन के छह जोड़े, मंगोलिया के सफेद वेगटेल के 4 जोड़े, 90 रिवर टर्न, 45 ब्लैक आइबिस, पाइड किंगफिशर के 4 जोड़ों सहित ओपन बिल्ड स्टॉर्क आदि गिने गए।
मानवीय दखलंदाजी पंछियों को नहीं भायी
बर्ड वाचिंग टीम के आकलन के अनुसार इस बार कालका माता नर्सरी, दूधतलाई के पेटे से सीसारमा गांव तक पीछोला के फैलाव क्षेत्र में जगह—जगह चल रही मिट्टी की खुदाई व खेतीबाड़ी के कारण पंछियों की संख्या बहुत कम है। एक्सपर्ट सुनील दुबे ने बताया खुली पीछोला में बोटिंग व लोगों के नहाने—धोने की वजह से प्रवासी पक्षियों का बसेरा नहीं के बराबर है।
फतहसागर में शिल्पग्राम वाले छोर पर पंछियों को देखा गया है जबकि बड़ी रोड, संजय पार्क आदि इलाके में मानवीय दखल, मत्स्याखेट आदि की वजह से पंछी दिखाई नहीं दे रहे। दुबे के अनुसार तेज सर्दी नहीं पड़ने की वजह से भी पक्षियों ने आने में देरी की है, कड़ाका बढ़ने पर संभव है कि इनकी तादाद और बढ़ने लगे।










