3 लाख में मिला 15 दिन का वीसी
उदयपुर. सुविवि में वीसी की नियुक्ति का पैनल बनाने वाली सर्च कमेटी की बैठकों पर 3 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। इस दरम्यां यूनिवर्सिटी में वीसी की नियुक्ति हुई, लेकिन 15 दिन बाद ही बेहतर प्रस्ताव मिलने पर नए वीसी इस यूनिवर्सिटी को छोड़कर चले गए। अब नए वीसी की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी की बैठकों का आयोजन हो रहा है और वीसी की नियुक्ति के लिए होने वाला खर्च बढ़ता जा रहा है।
दो साल में वीसी की नियुक्ति का सफर
सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में कुलपति का पद अगस्त, 2007 में प्रो. बीएल चौधरी के कार्यमुक्त होने से रिक्त हुआ था। इसके बाद राज्यपाल ने दो साल में दो सर्च कमेटी गठन किया है। इन कमेटियों की 7—8 बैठकें हुई। इसी साल 25 जून को लखनऊ में आईआईएम के प्रोफेसर धर्मेद्रसिंह सेंगर की कुलपति पद पर नियुक्ति हुई। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी का ऑफर मिला तो वे 9 जुलाई को सुखाड़िया यूनिवर्सिटी छोड़कर चले गए। फिर सर्च कमेटी का गठन किया गया।
आंदोलन पर आंदोलन हुए
सवा दो साल की अवधि में छात्रों समेत शिक्षकों व शैक्षणोत्तर कर्मचारियों ने भी स्थायी कुलपति की नियुक्ति के लिए आंदोलन किए। एबीवीपी, एनएसयूआई, सुविवि अजाजजा छात्र संगठन, छात्र संघर्ष समिति ने विवि को बंद करवाया। सुविवि शिक्षक संघ (सूटा) व शैक्षणोत्तर कर्मचारी संघ ने भी आंदोलन किए।
क्यों नहीं हो सकी वीसी की नियुक्ति
सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में प्रोफसरों के बीच राजनीति के चलते वीसी की नियुक्ति नहीं हो सकी है। दो गुटों के बीच खींचतान के कारण किसी एक नाम पर सहमति नहीं हो सकी। दोनों ही गुटों के लोगों ने एक दूसरे के खिलाफ शिकायतें कर वीसी की नियुक्ति को अटकाए रखा।










