शौक सैर-सपाटा, पेशा केवल चोरी !
जबलपुर. मदन महल पुलिस ने एक ऐसे शख्स को दबोचा है, जिसका पेशा केवल चोरी करना है। जितेन्द्र नाम का यह शख्स महाराष्ट्र, रायगढ़ जिले के ग्राम रोहा का रहने वाला है और वह पूरे देश में घूम-घूमकर वारदातें करता है। उसका वारदात करने का तरीका कुछ ऐसा है कि उसे सुनकर पुलिस कर्मियों ने भी दांतों तले अंगुली दबा ली।
शक्ल और पहनावे से टिपटॉप दिखने वाला जितेन्द्र यहां बस स्टैंड स्थित पवार होटल में रुका हुआ था। इस होटल के एक कमरे में रुके पवई निवासी जनार्दन श्रीवास्तव के दो मोबाइल फोन चोरी हो गए।
बस यहीं जितेन्द्र की किस्मत धोखा दे गई और वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस के अनुसार हुआ यह कि श्री श्रीवास्तव के मोबाइल चोरी करने के बाद जितेन्द्र ने अचानक होटल बदल लिया। शक के आधार पर जब पुलिस ने उसे शारदा होटल से दबोचा तो पुलिस अधिकारियों की आंखे फटी रह गईं।
दरअसल जितेन्द्र के पास श्री श्रीवास्तव के दोनों मोबाइल फोन तो मिले ही, उसके पास थैले में सौ से ज्यादा चाबियां मिलीं। एसपी अनन्त कुमार सिंह के मागदर्शन में बस स्टैंड चौकी की पुलिस ने पूछताछ की तो जितेन्द्र ने ऐसे राज उगल दिए, जिसकी पुलिस ने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
पूरे देश के होटलों की चाबियां जितेन्द्र के थैले में जो चाबियां मिलीं, उनमें बकायदा कागज के टेग लगे हुए हैं। उन टेगों में शहर और संबंधित होटल का नाम और रूम नम्बर तक लिखा हुआ है। पुलिस को माजरा तब समझ में आया, जब मास्टर माइंड जितेन्द्र ने राज खोला कि यह चोरी के ब्रम्हास्त्र हैं।
दरअसल जितेन्द्र जिस होटल में रुकता था, वह उसके रूम की डुप्लीकेट चाबी बनवा लेता और चला जाता था। कुछ समय बाद वह फिर उस होटल में रुकता और मौका पाकर उस रूम में रुके लोगों का सामान, पैसे आदि पार कर देता, जिसकी डुप्लीकेट चाबी उसके पास मौजूद रहती है।
बैग में इंडिया का नक्शा जितेन्द्र के बैग में पुलिस को इंडिया का नक्शा मिला है। वह इस मानचित्र के हिसाब से पूरे देश में अलग-अलग शहरों में जाकर रुकता और वहां होटलों में चोरी करता था। सैर-सपाटा तो उसका शौक ही, उसके पास मिली डायरी में उसके अय्यास मिजाज की इबारतें भी दर्ज हैं, वह अविवाहित है।
पचासों शहर, दर्जनों नाम जितेन्द्र के पास मिली चाबियों में लगे टेगों में यवतमाल, बालाघाट, नागपुर, चेन्नई, पूना, हैदराबाद, मुंबई समेत पचासों शहरों का नाम व होटल के रूम का नम्बर लिखा है। पुलिस के अनुसार जितेन्द्र ने स्वीकार किया कि वह इन सभी शहरों और उन होटलों में चोरी की वारदात को अंजाम दे चुका है, जिनकी डुप्लीकेट चाबी उसके पास है।
वह होटल में रुकने के लिए हर बार नाम बदल लेता था। पवार होटल में इस बार उसने अपना नाम सुरेश गादिया लिखाया था। वह 4 नवम्बर को जबलपुर आया था। इसके पहले भी वह यहां आ चुका है।
बालाघाट में ट्रेजरी में वारदात पुलिस को सन्देह है कि जितेन्द्र जैन ने ही बालाघाट की ट्रेजरी में चोरी की वारदात को अंजाम दिया। उसके पास कई क्रेडिट कार्ड और एटीएम कार्ड मिले हैं। बालाघाट से आई पुलिस टीम द्वारा जितेन्द्र से पूछताछ की जा रही है।
मसाज और नए कपड़े जितेन्द्र के बैग में बॉडी मसाज कराने की रसीदें और कपड़ा खरीदी की भी कई पर्चियां मिली हैं। पुलिस का मानना है कि जितेन्द्र वारदात के बाद मंहगे और मनपसंद कपड़ों की खरीदी तो करता ही था। वह बॉडी मसाज आदि भी कराता था।
चोरियों की गिनती याद नहीं पुलिस के अनुसार जितेन्द्र के परिवार में कोई नहीं है। सात साल पहले उसने घर छोड़ा तो फिर वापस लौटा ही नहीं। होटलों में रुक कर चोरी करने का नायाब पेशा व पिछले सात सालों से कर रहा है। चुराए हुए मोबाइल व अन्य सामग्री वह सस्ते दामों में बेच देता था। वह अब कितनी वारदातों को अंजाम दे चुका है, उसकी गिनती भी उसे याद नहीं है। पुलिस उससे कुछ राज उगलवाने का प्रयास कर रही है।










