टड़ा सहकारी समिति पर एक और एफआईआर होगी
सागर. सहकारिता विभाग ने सहकारी संस्थाओं में आर्थिक गड़बड़ी पर लगाम लगाने के लिए एफआईआर का सहारा लिया है। इसके तहत टड़ा सहकारी समिति में विशेष आडिट के दौरान उजागर गबन मामले में कोऑपरेटिव बैंक द्वारा आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इससे पहले इस संस्था के विरुद्ध लोकायुक्त द्वारा कार्रवाई की गई थी। जिसमें वर्ष 97-98 के दौरान हुए गबन के आरोपियों के खिलाफ एफआईआर हुई थी। सहायक पंजीयक राजेश क्षत्री का कहना है कि इस सहकारी संस्था में पिछले 10 वर्र्षो के दौरान भारी आर्थिक अनियमितता हुई है। यह गड़बड़ी विशेष आडिट में सामने आ रही है। वर्ष 98-99 के आडिट से स्पष्ट हुआ है कि संस्था में बड़े स्तर पर गबन हुआ है।
जिन सहकारी संस्थाओं में सहकारिता की शर्र्तो का पालन नहीं हो रहा है उनके खिलाफ सरचार्ज का मामला बनाया जाएगा। इससे वे कार्रवाई के दायरे में आएंगी। सभी सहकारी समितियों के कामकाज पर विभाग नजर रखे हुए है।
अन्य समितियों के आडिट में आर्थिक गड़बड़ी विभाग की पकड़ में आई है। संस्थाओं पर सरचार्ज की कार्रवाई प्रस्तावित किए जाने का सिलसिला टड़ा की समिति से शुरू हुआ है। फिलहाल इस संस्था का वर्ष 2000 के बाद के वर्र्षो का आडिट किया जा रहा है। 1339 प्राथमिक सहकारी संस्थाओं में से 550 संस्थाओं के आडिट हुए हैं। 31 मार्च तक सभी संस्थाओं के आडिट करने का लक्ष्य है।
लोकायुक्त कार्रवाई के दायरे में-को-ऑपरेटिव बैंक के महा प्रबंधक ज्ञानेन्द्र पांडे ने बताया है कि टड़ा समिति में गबन मामले में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर के लिए जरूरी दस्तावेज केसली थाने में जमा किए है। यह प्रक्रिया लोकायुक्त कार्रवाई का एक हिस्सा है।
लोकायुक्त के निर्देश पर ही सहकारिता विभाग इस समिति का वर्ष वार आडिट कर रहा है। फिलहाल इस गबन मामले में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर के अलावा और कोई कार्रवाई नहीं हुई है।










