Tuesday, November 17, 2009 01:11 [IST]  

danik bhaskarआचार संहिता के भंवर में विशेष सम्मेलन

Bhaskar News

रायगढ़. सोमवार को तकरीबन 28 पाषर्दों ने आयुक्त भुवनेश यादव को एक हस्ताक्षितयुक्त ज्ञापन सौंपते हुए नगर पालिक अधिनियम की धारा 30 के तहत जल्द से जल्द विशेष सम्मेलन 9 नवंबर के विषय के साथ बुलाए जाने की मांग की है। अपने सात सूत्रीय ज्ञापन में पार्षदों ने कहा है कि 9 नवंबर को विशेष सम्मेलन आगामी तिथि तक के टाल दिया गया था।



ऐसी क्या जरुरत आन पड़ी की दूसरे दिन 10 नवंबर को आनन-फानन में विशेष सम्मेलन बुलाना पड़ा। इस सम्मेलन की सूचना निगम कर्मचारी अनिल वैद्य ने कुछ पार्षदों को मोबाइल से दी। बैठक 11 बजे आहूत किया गया था। जबकि इसकी सूचना सभी पाषर्दों को नहीं दी गई। यहां तक की बैठक की सूचना निगम के सूचना पटल में 12 बजे लगाया गया। सूचना चस्पा किए जाते एक पाषर्द ने इसकी मोबाइल से बकायदा वीडियो रिकार्डिग की है।



9 नवंबर के विशेष सम्मेलन की विषय सूची में कुछ प्रस्तावों पर आर्थिक अनियमितता की आशंका पाषर्दों को थी। प्रस्ताव कं्र. 1-5 तक का विषय विद्युत पोल कार्य का पुनरक्षित प्राक्कलन से जुड़ा था। इसमें परिषद को विश्वास में लिए बिना अतिरिक्त कार्य निगम के उच्च अधिकारियों द्वारा करवा लिया गया था। इस कार्य के लिए विधिवत स्वीकृति लिए बिना पूर्व से ही ठेकेदार से पोल की सप्लाई ले ली गई थी।



तत्कालीक समय में भी कुछ पार्षदों द्वारा इसकी शिकायत सक्षम अधिकारी के समक्ष की गई थी। पाषर्दों का कहना है कि सम्मेलन में विषय सूची 16 व 17 में वाहन क्रय से संबंधित है, जिसमें आयुक्त द्वारा परिषद के बगैर स्वीकृति के करोड़ों रुपए की राशि के वाहन खरीदने की औपचारिकता पूरी कर ली गई। जिसे पार्षदों ने परिषद के क्षेत्राधिकार का हनन बताया है। 10 नवंबर की बैठक में कुल 16 पार्षदों की उपस्थिति थी जो कुल 40 पाषर्दों के आधे से भी कम है।



जिसमें बैठक में 8 पार्षदगण जयंत ठेठवार, अनूप रतेरिया, आशीष ताम्रकार, सावन चौहान, लखेश्वर मिरी, विजयचंद्र टोप्पो, श्रीमती अनुषा कातोरे, श्रीमती मालती सिंह, श्रीमती संध्या देवी मिश्रा, श्रीमती यशोदा सारथी ने एक स्वर में जनहित के तीन-चार विषय छोड़ कर बाकी सभी विषयों को निरस्त करने का विचार सदन में रखा था। ह ालांकि, शेष उपस्थित पार्षदगण मौन थे। इसके बाद भी उस बैठक के सभी विषयों की स्वीकृति होने की जानकारी मिली।



ठेकेदार के सहपाठी तकनीकी अधिकारी



पार्षदों ने आरोप लगाया है कि निगम के तकनीकी अधिकारी डीके शर्मा द्वारा बिना स्वीकृति पोल की सप्लाई लेना आर्थिक हित था। पार्षदों का कहना है कि संबंधित ठेकेदार डीके शर्मा के सहपाठी भी हैं। इस कारण उस अधिकारी द्वारा इस प्रकार का कृत्य किया गया।



जनता के पैसे से खरीदी बोलेरो



पार्षदों का यह भी कहना है कि बीते एक माह में आम जनता से एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि टेक्स के रुप में प्राप्त की है। यह राशि होने के बाद भी सड़क, नाली, पानी जैसे मूलभूत समस्या दूर करने की स्वीकृति पार्षदों के आवेदन देने के बावजूद इसीलिए नहीं दी गई है कि निगम में फंड नहीं है। फिर अचानक करोड़ों के वाहन खरीदने की प्रक्रिया बिना परिषद स्वीकृति के कैसे कर दी गई। ज्ञात हो कि एक वाहन (बोलेरो) आयुक्त द्वारा शासन के अनुमति उपरांत क्रय किया है और भुगतान जनता द्वारा दी गई टेक्स से किया गया है।

  share
apne vichaar
post a comment
name:
email:
select your language:     Hindi Roman     Hindi Phonetic     English
comment:
code: