दहशत के बाद पलायन की मजबूरी
रायगढ़. लगातार पांच दिनों से आर्थिक नाकेबंदी के कारण पूरा तमनार अंचल विरोध के स्वर से गूंज रहा है। निजी उद्योग प्रबंधन से सुरक्षाकर्मियों के गिरफ्तार होने के बाद भी क्षेत्रीय ग्रामीण अपने कई मांगों को लेकर तमनार के बरभांठा चौक में चक्काजाम किए हुए थे।
प्रशासन, प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों की शनिवार को हुई बैठक बाद भी इस मामले का निराकरण नहीं हुआ था। नतीजतन क्षेत्र में दहशत भरे माहौल में बाहर से काम करने आए लोग अपना अस्थाई आसरा छोड़ पलायन करने मजबूर हैं। सोमवार की सुबह क्षेत्र के उद्योगों में काम कर रहे मजदूरों को अपनाआसियाना छोड़कर अपने गंतव्य की ओर जाते देखा गया।
उनसे पूछा गया तो वे अभी हाल में निर्मित माहौल व घट रहे घटना के चलते यहां जाना ही अपनी मजबूरी बताया ंऔर वे अपने जान-माल की सलामती के लिए वर्तमान में क्षेत्र को छोड़ देना ही उचित मान रहे हैं। दूसरी ओर अपनी मांगों को लेकर चक्क्काजाम कर रहे क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि उद्योग प्रबंधन के द्वारा लगातार उनकी उपेक्षा की जाती रही है, न तो स्थानीय लोगों को रोजगार मिल पाता है और न ही उद्योगों द्वारा स्थानीय मुद्दों को लेकर महत्व दिया जाता है।
जिस कारण से बाहरी लोगों को यहां नौकरी मिलती है और वे स्थानीय ग्रामीणों से बदतर व्यवहार करते हैं। जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण गत दिनों हुई घटना है। इसको लेकर के न केवल क्षेत्र वासियों में आक्रोश की भावना घर कर गई है। ग्रामीणों की एकजुटता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रबंधन और प्रशासन को समझौते के लिए बैठक करने को मजबूर कर दिया। बावजूद इसके शनिवार को त्रिपक्षीय बैठक असफल हो गई।
कंपनी प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों के बैठक में नहीं आने के कारण उन्होंने ग्रामीणों की मांगों को पूरा करने में असमर्थता व्यक्त की और मामला जहां का तहां अटक गया।










