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Tuesday, November 17, 2009 02:21 [IST]  

danik bhaskarजुगाड़ में भू-माफिया, पार्षद चौकस

संदीप शर्मा

अम्बाला. सदर नप की विस्तारित सीमा में अविकसित कालोनियों को भी अप्रूव्ड करवाने के लिए भू-माफिया व बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियों के ‘खेल’ का दैनिक भास्कर द्वारा खुलासा किए जाने के बाद माफिया में खलबली मच गई है।



मंगलवार को होने वाली नप की मीटिंग में किसी भी सूरत में उनकी कालोनियां नियमित होने का प्रस्ताव पास हो जाए, इस गरज से जनप्रतिनिधियों को ‘मनाने’ की जुगत दिन भर जारी रही। इसी बीच मौके पर जाकर भास्कर द्वारा जुटाई गई जानकारी में सामने आया कि प्राइवेट एजेंसियों द्वारा करवाए गए सर्वे में और भी कई गोलमाल हैं।



इंडस्ट्रियल एरिया के सामने (अपोजिट) खुड्डा खुर्द के रकबे में 12.44 एकड़ में कटी सोनिया कालोनी में 26 मकान बने और पांच प्लाट खाली दिखाए गए हैं। जमीनी हकीकत यह है कि यहां अभी दो मकान बने हैं, कुछ प्रापर्टी डीलरों ने अपने आफिस बनाए हुए हैं और इक्का-दुक्का मकानों की नींवें आदि भरने का काम चल रहा है।



सूत्र बताते हैं कि इसके आसपास और भी कई कालोनियां कटी हैं, जो कागजों में 50 फीसदी से ज्यादा विकसित दिखाई गई हैं जबकि हकीकत में यहां जमीन खाली पड़ी है। इंडस्ट्रियल एरिया से एकदम सटे खुड्डा खुर्द के 67.67 रकबे में विकासपुरी कालोनी के नाम से 83 निर्मित मकान व 35 खाली दिखाए हैं जबकि 10.07 एकड़ में विकासपुरी एक्सटेंशन में 13 मकान बने और सिर्फ दो खाली दिखाए है।



नदी में ही कालोनी



कागजों में सरसेहड़ी के रकबे में टांगरी नदी बंध के अंदर तक ही कालोनियां विकसित दिखाई गई हैं जबकि हकीकत यह है कि कंस्ट्रक्शन कंपनी ने यहां सड़क तो डलवा दी मगर करीब 100 एकड़ भूमि में कोई मकान नहीं है। सलारहेड़ी व खुड्डा गांवों के रकबे में बनी कालोनियों को तो नप की विस्तारित सीमा में लिया गया।



जनता का क्या नुकसान



अप्रूवड होते ही इन अविकसित कालोनियों में प्रापर्टी के रेट बढ़ जाएंगे। लोगों को प्लाट महंगा मिलेगा, नप के टैक्स भी देना पड़ेगा और सुविधाएं मिलने भी देरी लगेगी।



सरकार को नुकसान



कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने बड़े भू-भाग खरीदे हैं। कायदे से उन्हें कालोनी काटने के लिए चेंज आफ लैंड यूज़ सर्टिफिकेट चाहिए। साथ ही कालोनी में सुविधाएं भी देनी पड़ती हैं। इससे बचने के लिए इन्होंने छोटे-छोटे रकबे में अलग-अलग कालोनियां काटी ताकि सीएलयू के फेर से बचें और सरकार को राजस्व न देना पड़े।



सदन का फर्ज है कि जायज प्रस्ताव ही पास हो। जो कालोनियां सरकार के नियमों को पूरा करती हैं वहीं कालोनियां नियमित होनी चाहिए। यदि सर्वे में गड़बड़ी है तो दुबारा होना चाहिए। - रिया रतरा, पार्षद।



नप की तरफ से सिर्फ कालोनियों के नाम वाली लिस्ट दी गई है। खाली कालोनी को विकसित दिखाकर अप्रूवड करवाने का प्रयास हो रहा है तो अधिकारी इसके लिए जिम्मेवार होंगे। - हीरा लाल यादव, पार्षद ।



कुछ प्रभावशाली लोगों ने प्रस्ताव पास करवाने के लिए संपर्क किया था। हम कुछ भी गलत नहीं करेंगे। पार्षदों को कालोनियों की डिटेल मिलनी चाहिए ताकि मौके का मुआयना हो। - कमल किशोर जैन, पार्षद।



40 फीसदी से ज्यादा कालोनियों में तो सही प्रकार से प्लाट भी नहीं कटे हैं। करीब 20 कालोनियों के नाम पर केवल खेत दिखाई देते हैं। नक्शा से स्थिति स्पष्ट होगी। - महेश गोयल, पार्षद।



बगैर देखे हमें प्रस्ताव पर मुहर नहीं लगानी चाहिए। इन कालोनियों का साइट प्लान उपलब्ध करवाया जाना चाहिए। जो कालोनियां 50 फीसदी से ज्यादा विकसित हैं वहीं अप्रूवड हों। - नीलम शर्मा, पार्षद।



सरकार की हिदायतों के अनुसार तो 35-40 कालोनियों ही अप्रूवड की पात्र लगती हैं। हम तो इसी बात पर जोर देंगे कि वही कालोनी अप्रूवड हो जो हिदायतें पूरी करती है। - नरेंद्र बंगाली, पार्षद।

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