अविश्वास प्रस्ताव कोर्ट से खारिज
अम्बाला. 24 अप्रैल को 28-0 से अविश्वास प्रस्ताव पास कर प्रधान पद से हटाई नीलम शर्मा को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने के निर्देश दिए हैं। अब लाख टके का सवाल यह है कि नीलम का अगला कदम क्या होगा।
सदर नप के इतिहास में यह दूसरा मौका जब अविश्वास प्रस्ताव के बावजूद प्रधान की कुर्सी कोर्ट से मिली राहत से बची हो। 10 साल पहले सुदर्शना दुआ की कुर्सी भी हाईकोर्ट में जाकर बची थी। नीलम की तरफ से हाईकोर्ट में अविश्वास प्रस्ताव नोटिस को (72-ए के तहत) चुनौती देती याचिका दायर कर दी थी।
जिसमें दलील दी गई थी कि नियमों के मुताबिक अविश्वास प्रस्ताव के लिए 15 दिन का नोटिस देना होता है मगर प्रशासन ने 9 दिन का ही नोटिस दिया। दाखिल याचिका में कहा गया कि 5 मई 2005 को वे अंबाला सदर से पार्षद चुनी गई थी। इसके बाद वे एमसी अध्यक्ष बनी।
इसी दौरान 27 जून 2007 को उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया जो असफल रहा। इसके बाद मार्च 2009 में फिर से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। इस बारे में 31 मार्च को बैठक होनी थी जो नहीं हो पाई। इसके बाद 24 अप्रैल को प्रस्ताव पारित कर दिया गया। तभी से उपप्रधान सुधीर जयसवाल प्रधान पद का जिम्मा संभाल रहे हैं। नगर परिषद का कार्यकाल चार-पांच महीने बचा है।
एकजुट रहे पार्षद: नीलम शर्मा कांग्रेस से जुड़ी हैं। डेढ़ वर्ष तक पार्षदों ने उन्हें कुर्सी से हटाने के लिएसंघर्ष किया और कांग्रेसी पार्षदों ने भी इस मुहिम में साथ दिया। जून 2007 में पार्षदों का पहला प्रयास विफल रहा। मगर पार्षदों ने हार नहीं मानी। पार्षदों ने प्रधान पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और विकास में रोड़ा बनने के आरोप लगाए।
24 अप्रैल को अविश्वास प्रस्ताव के दिन नीलम शर्मा और कट्टर कांग्रेसी सुरेश त्रेहन व वेदप्रकाश के अलावा सभी 31 पार्षद बैठक में आए थे और सभी ने नीलम के खिलाफ वोट डाला था। बैठक में कांग्रेस के 12 में से 9, भाजपा के 7, विकास परिषद के पांच, इनेलो के तीन, बसपा का एक और तीन आजाद पार्षद थे।
मुझे न्याय मिला
मैंने हमेशा ही जनहित में निस्वार्थ सेवा की है। मुझे न्याय मिला है। हाईकोर्ट के आदेश की प्रति मिलने के बाद ही अगला कदम तय होगा। - नीलम शर्मा










