...अब थ्रीडी एनिमेशन का जमाना
चंडीगढ़. किसी इमारत का डिजाइन तैयार करने के लिए कागज पर लाइनें लगाना व आकृतियां उकेरना बीते जमाने की बात हो गई है। इस काम के लिए अब थ्रीडी एनिमेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होने लगा है।
शहर के ज्यादातर बिल्डर और आर्किटेक्ट नए प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले इसी टेक्नोलॉजी से नक्शे तैयार करा रहे हैं। इससे उन्हें बिल्डिंग का सही लुक पता चल जाता है कि बनने के बाद वह वास्तव में कैसी दिखेगी। शहर में इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है।
महंगे सॉफ्टवेयर
एनिमेटेड डिजाइन तैयार करने के लिए सॉफ्टवेयर काफी महंगे होने की वजह से यह टेक्नोलॉजी बड़े प्रोजेक्ट तक ही सीमित है। हाईवे डिजाइन, सोसायटी फ्लैट, लैंड स्केपिंग, अपार्टमेंट, होटल, शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स जैसे बड़े प्रोजेक्ट के लिए यह काफी फायदेमंद साबित हो रही है।
पांच से छह लाख खर्च
मार्केट में थ्रीडी मैक्स, माया, ऑटो डेस्क, रेविट सहित 15 सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं जिनसे बिल्डिंग का एनिमेटेड डिजाइन तैयार किया जा सकता है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से स्कल्प्चर और पेंटिंग्स भी बनाई जा रहीं हैं। किसी इमारत का डिजाइन तैयार कराने में लगभग चार से छह लाख रुपये खर्च आता है, जबकि इसका फोटो प्रिंट लेने में पांच से छह हजार खर्च होते हैं।
सेक्टर-17 स्थित केसी मॉल के मालिक अशोक कुमार के मुताबिक कंस्ट्रक्शन से पहले ही पूरा डिजाइन सामने होने से बहुत सुविधा होती है। शॉपिंग मॉल की बात करें तो दुकानें बेचने व किराये पर देना आसान हो जाता है। मॉल की बनावट, लॉबी, शॉपिंग सेंटर आदि देखकर खरीदार आसानी से फैसला ले लेते हैं।
पिकाडली मॉल, सेक्टर-34, के मालिक श्याम सुंदर शर्मा कहते हैं कि, थ्रीडी एनिमेशन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से बनने वाली बिल्डिंग के डिजाइन ज्यादा स्पष्ट होते हैं। इससे पता चल जाता है कि बिल्डिंग बनने के बाद कैसी दिखेगी। होटल पर्ल के मालिक यशपाल महाजन कहते हैं कि असल इमारत बनने से पहले उसकी पूरी तस्वीर दिखकार थ्रीडी एनिमेशन टेक्नोलॉजी हर शंका को दूर कर देती है।
घर, दुकान, मल्टीप्लेक्स या शॉपिंग मॉल देखने में कैसा लगेगा, थ्रीडी एनिमेशन टेक्नोलॉजी से बने डिजाइन में देख सकते हैं। इसमें घर के अंदर का इंटीरियर तक देखा जा सकता है। लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से तैयार की गई एनिमेटेड सीडी में तो लोगों के होटल या मॉल में घूमते हुए भी देख सकते हैं।
यशपाल महाजन, मालिक, होटल पर्ल, इंडस्ट्रियल एरिया
घर बनने के बाद कैसा दिखेगा और इसका इंटीरियर कैसा होगा? यह सब थ्रीडी टेक्नोलॉजी से तैयार होने वाले डिजाइन में देखा जा सकता है। इससे आर्किटेक्ट का भी काम काफी आसान हो गया है। पसंद न आने पर डिजाइन को आसानी से बदला जा सकता है। यह टेक्नोलॉजी मार्केटिंग में भी अहम भूमिका निभा रही है। इससे प्रोजेक्ट की किसी को जानकारी देने में आसानी रहती है।
विनोद जोशी, आर्किटेक्ट
चार पांच साल पहले तक नक्शा तैयार करने में घंटों लग जाते थे। अगर नक्शा दोबारा बनाना पड़ जाए तो और भी मुसीबत थी। अब चंद मिनटों में कम्प्यूटर पर डिजाइन तैयार कर सकते हैं। इसमें जरूरत पड़ने पर बदलाव भी आसानी से हो जाता है। इस टेक्नोलॉजी से डिजाइन तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर काफी महंगे है। हर आर्किटेक्ट इस सॉफ्टवेयर को नहीं खरीद सकता।
सुरिंद्र बाहगा, चेयरमैन, चंडीगढ़ एंड पंजाब चेप्टर ऑफ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स










