इंदौर. शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे भले ही अपने को मराठी समाज का ठेकेदार मानते हैं, भले ही उन्होंने ‘आमची मुंबई’ का राग छेड़ रखा हो, लेकिन आम ‘मराठी मानुस’ के मन में तो महाराष्ट्र की जगह पूरा हिन्दुस्तान रचा-बसा है।
वे इन नेताओं की कथनी-करनी को राजनीति की चाशनी में डूबा हुआ मान रहे हैं, जो भारतीय समाज में मीठा जहर घोल रहे हैं। ‘भास्कर’ ने इनको टटोला तो उन्होंने इन ठेकेदारों की बातों को सिर्फ राजनीतिक पैंतरा माना।
अनेकता में एकता है पहचान
हमारे देश की पहचान अनेकता में एकता की है। जातिवाद व प्रदेशवाद से कोई व्यक्ति ऊंचा नहीं बनता। - अभय माणोक, संगीत कलाकार
वे तो बांटना चाहते हैं
मैं मराठी हूं, इस बात का गर्व तो है, लेकिन यह दु:ख भी है कि वे भाषाओं के आधार पर हमें बांटना चाहते हैं। - अजय करमरकर, शिक्षाविद्
जो काबिल होगा, वह बढ़ेगा
नौकरी हो या राजनीतिक क्षेत्र, जो जिस पद के काबिल है, उसे वह मिलेगा। विशिष्टता में मराठी या बिहारी नहीं होना चाहिए। - अनिल मोडक सचिव महाराष्ट्र साहित्य सभा
सभी बदलें नजरिया
भाषावाद व जातिवाद एक नेचर है, जो हर जगह होगी। इसे रोकने के लिए सभी को अपना नजरिया बदलना होगा। - श्रीकांत तारे, शिक्षाविद्
राजनीतिक रोटी सेंक रहे हैं
भाषावाद मनसे व शिवसेना की भड़काई आग है। इसमें वे राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं। - श्रीपाद कुलकर्णी, सचिव सुरती प्रतिष्ठान
नेता करवाते हैं लड़ाई
नेता पहले तो आम लोगों को भड़काकर भाषावाद की लड़ाई शुरू कर देते हैं। बाद में वे अपने ही स्टेटमेंट्स पर लीपापोती कर बच जाते हैं। - शुभा वैद्य, चित्रकार
.. तो बड़ा नहीं होता इंसान
हिंदी, मराठी को बांटकर देश की अखंडता को खतरे में डाला जा रहा है। क्षेत्रवाद व भाषा मात्र से इंसान बड़ा नहीं बनता। - माया इंगले डीन, पूर्व छात्र कल्याण संघ, देअविवि
देश के टुकड़े करने में लगे हैं
जिनको राष्ट्र के विकास के बारे में सोचना चाहिए, वे ही देश के टुकड़े करने में लगे हैं। बड़े नेता ऐसी बातें करें, यह शर्मनाक है। - सुधाकर कापड़े, आर्किटेक्ट
डाली जा रही हीन भावना
हर व्यक्ति भारतवासी है। उसके दिल में बंटवारे की हीन भावना डालकर देश में खतरा पैदा किया जा रहा है। - कल्पना झोकरकर











