यूआईटी भी पहुंची हाईकोर्ट
भास्कर न्यूज x अजमेर
चंद्रवरदायी नगर में निर्माणाधीन मॉल के विवादित निर्माण को तोड़ने व जमीन का कब्जा लेने संबंधी संभागीय आयुक्त के निर्णय को नगर सुधार न्यास ने रिट के जरिये हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मॉल मालिक इस मामले में पहले ही रिट दायर कर चुका है।
संभागीय आयुक्त की अदालत ने गत 16 अक्टूबर को मॉल के मामले में भू उपयोग परिवर्तन की कार्रवाई को नियमविरुद्ध ठहराते हुए यूआईटी को 30 दिन में निर्माण ध्वस्त कर जमीन का कब्जा लेने के आदेश दिए थे।
डीसी अतुल शर्मा ने श्यामसुंदर तापड़िया व रामधन आचार्य तथा अन्य की ओर से यूआईटी व वाजिद खान के खिलाफ दायर दो याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए जमीन आवंटन को अवैध बताया था और इस मामले में जिम्मेदार अफसर व कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश भी दिए थे।
याचिकाओं के मुताबिक यूआईटी ने गलत तरीके से जमीन आवंटित की है और अप्रार्थी वाजिद खान अवैध रूप से मॉल का निर्माण करा रहा है। डीसी ने माना कि यूआईटी ने विवादित प्रकरण को अपने स्तर पर निस्तारित करने से पहले ही समझौता समिति में रखकर नियमविरुद्ध काम किया है। समझौता समिति ने उक्त जमीन पर वाजिद का स्वामित्व प्रमाणित नहीं होने के बावजूद भूमि आवंटित करने की सिफारिश कर दी। योजना क्षेत्र की रिजर्व भूमि का व्यावसायिक भू उपयोग करने दिया।
अदालत ने क्षेत्र के लेआउट प्लान में भी कई बार सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना परिवर्तन को गंभीर माना था। डीसी के फैसले में कहा गया था कि योजना क्षेत्र की सड़कों की चौड़ाई में बिना उप नगर नियोजक की सहमति के फेरबदल कर दिया गया।
नगर सुधार न्यास ने दस्तावेज पेश कर जमीन पर वाजिद का मालिकाना हक बताया लेकिन वाजिद ने ऐसे कोई दस्तावेज पेश नहीं किए, जिससे उसे भूमि आवंटन या किसी भी प्रकार का अनुतोष पाने का अधिकारी माना जाए। संभागीय आयुक्त के इस फैसले को वाजिद खान ने पहले हाईकोर्ट में रिट दायर कर चुनौती दी। अब नगर सुधार न्यास ने भी फैसले के विरोध में रिट दाखिल कर दी है।










