अभी सस्ती शकर बेचने का मूड नहीं
सागर. थोक व्यापारी एक बार फिर लोगों को बाजार से कम रेट पर शकर उपलब्ध कराने के मूड में नहीं हैं। जिला प्रशासन भी दोबारा सस्ती शकर बिकवाने के प्रति गंभीर नहीं है। दोनों की नजर सरकार की 27 रुपए प्रतिकिलो वाली उस शकर पर लगी है। जिसका क्रियान्वयन अगले माह थाइलैंड से शकर आने के बाद हो पाएगा।
गौरतलब है कि सरकार की स्कीम बाजार में 27 रुपए प्रतिकिलो शकर बेचने की है। मप्र थोक शुगर व्यापारी संघ के संयुक्त सचिव विजय नीखरा बताते हैं कि नो प्रॉफिट-नो लास पर खुले बाजार में सस्ती शकर उपलब्ध कराने का करार सिर्फ एक माह के लिए था। इसके तहत चार सप्ताह सस्ती शकर बांटी गई थी। उस दौरान बाजार में भी शकर के रेट डाउन हो गए थे।
पंडाल में सस्ती शकर लेने के लिए कम लोग आए थे। एक अन्य शकर व्यापारी अशोक गुप्ता ने बताया कि संघ को सस्ती शकर बिकवाना घाटे का सौदा लगा। क्योंकि टैंट और सेल्समैन का खर्च भी संघ को उठाना पड़ा था। दीपावली के बाद शकर के रेट फिर बढ़े हैं।
बाजार में लोग 37 से 38 रुपए प्रति किलो के भाव से शकर खरीद रहे हैं। ऐसे में आम उपभोक्ता को सस्ती शकर की दरकार है, लेकिन जिला प्रशासन और थोक व्यापारी लोगों को महंगाई के मौजूदा दौर कुछ सस्ती शकर उपलब्ध कराने के बजाए सरकार की 27 रुपए किलो वाली मिठास की खेप के आने का इंतजार कर रहे हैं। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से शकर का भाव बढ़ने लगा था। जो अभी थमा नहीं है। व्यापारी भी बाजार में विदेशी शकर आने के पहले स्टॉक कम करने के प्रयास में लगे हैं।
सरकारी शकर भी गायब लोगों को शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से 13.50 रुपए प्रति किलो के भाव से उपलब्ध कराई जाने वाली बेहद सस्ती शकर का टोटा दूर नहीं हो रहा है। दो लाख परिवारों को शकर का इंतजार है। नागरिक आपूर्ति निगम के शकर गोदाम अक्टूबर से खाली है।
यह कब भरेंगे इस बारे में अधिकारी कुछ नहीं बता पा रहे हैं। आपूर्ति निगम के प्रबंधक योगेंद्र सिंह कहते हैं कि आर्डर तो पिछले महीने ही दे दिए थे। क्यों नहीं आ रही है। इसकी जानकारी नहीं है। खाद्य विभाग के सहायक आपूर्ति अधिकारी आरएम सिंह ने बताया कि कोटा जारी कर दिया है।
आपूर्ति निगम में शकर आने पर राशन दुकानों पर शकर उपलब्ध कराई जाएगीे। अब प्रत्येक कार्ड पर दो किलो शकर वितरित की जाएगी। इसके लिए सात हजार क्ंिवटल शकर चाहिए। फिलहाल गोदाम खाली पड़े हैं।










