साक्षरता के लिए ढूंढ़ने होंगे वालियंटर
अलवर. केंद्र सरकार ने साक्षर भारत मिशन-२क्१२ के तहत पढ़ाने वालों के लिए मानदेय देने से इनकार कर दिया है। अब इसके लिए राज्य सरकार को स्वयंसेवक शिक्षकों की तलाश करनी होगी।
केंद्र सरकार ने सतत साक्षरता अभियान का नाम ही नहीं बदला, पढ़ने और पढ़ाने के तरीकों में भी खासा बदलाव कर दिया है। पहले प्रेरक, नोडल प्रेरक और सह-प्रेरक लोगों को साक्षर बनाते थे, केंद्र ने राज्य सरकार को लिखी चिट्ठी में स्पष्ट कर दिया है कि यह समाजसेवा का कार्य है और इसके लिए किसी तरह का मानदेय नहीं दिया जाएगा। केंद्र ने राज्य सरकार को भेजी चिट्ठी में यह भी लिखा है कि यदि इस कार्य में जुटे लोगों को राज्य सरकार या ग्राम पंचायत अपने स्तर पर भुगतान करती है तो केंद्र को इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी।
ऐसे में साक्षर भारत मिशन-२क्१२ के लिए राज्य सरकार को प्रदेशभर में वॉलियंटर्स की तलाश में खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है। अल्प मानदेय भी नहीं देने से इस मिशन की सफलता पर शुरुआत से पहले ही सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रेरक करेंगे सुपरवीजन
मिशन के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो प्रेरकों की नियुक्ति की जाएगी। प्रेरकों के मानदेय पर अभी सहमति नहीं हुई है। ये प्रेरक अब निरक्षर लोगों को पढ़ाने के बजाय स्वयंसेवक शिक्षकों का सुपरवीजन करेंगे। यदि किसी ग्राम पंचायत में पांच हजार से अधिक की जनसंख्या है तो वहां अतिरिक्त प्रेरक लगाए जाएंगे।










