इज्जत योजना को नहीं मिली ‘इज्जत’
पानीपत. रेलवे विभाग की इज्जत योजना को इज्जत नहीं मिल पाई है। योजना की असफलता का सबसे बड़ा कारण इसकी कड़ी शर्तो का माना जा रहा है। इज्जत की विफलता का सबसे बड़ा सबूत इस बात से मिलता है कि कई महीने बीतने के बाद भी केवल एक व्यक्ति ही इस यंोजना का लाभ उठा पाया है।
यह थी योजना
इज्जत योजना के तहत केवल 25 रुपए में एक महीने के लिए रोजाना 100 किलोमीटर तक की रेलयात्रा का पास बनाया जाता है। रेलमंत्री ममता बनर्जी ने गरीब लोगों को बहुत बड़ी सुविधा के तौर पर इज्जत योजना को लागू किया था, ताकि उन्हें ज्यादा दिक्कत न हो और वे भी कम पैसों में ही ट्रेन में सफर का फायदा उठा सकें। शुरुआती स्तर पर तो इसमें रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी रुचि दिखाई, मगर समय बीतने के साथ इस योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पाया।
ये थीं शर्ते
यह योजना उन लोगों के लिए ही थी, जिनकी मासिक आय 1500 रुपए से कम हो। यही नहीं ऐसे व्यति को अपना आय प्रमाण—पत्र बनवाकर उपायुक्त से सत्यापित भी करवाना पड़ता है। सांसद या कैबिनेट मंत्री के निर्देशों पर किसी व्यक्ति का पास बनाया जा सकता है।
केवल एक व्यक्ति ने पाई इज्जत
रेल मंत्री ममता बैनर्जी ने रेलवे बजट में इज्जत योजना की घोषणा की थी। इसके बाद अगस्त माह से योजना शुरू कर दी गई थी, जिसमें अब तक केवल एक व्यक्ति ने ही इज्जत के तहत पास बनवाने में सफलता हासिल की। कई महीने बीतने के बाद एक व्यक्ति को ही इस यंोजना का लाभ मिलना विडंबना है।
राज्य सरकार से था विरोधाभास
योजना के तहत 1500 रुपए से कम आय के व्यक्ति का मंथली पास बनाया जाता है। दूसरी ओर राज्य सरकार ने प्रदेश भर में 3500 रुपए न्यूनतम वेतन लागू किया है। इस तरह से इज्जत योजना और सरकार के न्यूनतम वेतन में विरोधाभास हो गया। यह सबसे बड़ी वजह रही, जिसके कारण इज्जत योजना सिरे नहीं चढ़ पाई।
योजना की 1500 रुपए से कम आय की शर्त ही इसके फ्लॉप होने का कारण है। इसके तहत केवल एक व्यक्ति ने ही पास बनवाया है। - धीरज कपूर, स्टेशन अधीक्षक, पानीपत










