339 में से सिर्फ 35 शिकायतें सही
भीलवाड़ा. ‘हर हाथ को काम और काम का पूरा दाम’ नारे को मूर्तरूप देने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की गति पकड़ती गाड़ी के सामने अनियमिताओं के अलावा झूठी शिकायतों के स्पीडब्रेकर भी आ रहे हैं।
यह दौर कुछ इस तरह चल पड़ा कि जिले में हर सातवां काम शिकायत की चपेट में है। बेनामी और झूठी शिकायतों का ढेर अब प्रशासन के लिए सिर दर्द साबित हो रहा है। लंबी कागजी खानापूर्ति और अधिकारियों का समय बर्बाद करने के बाद मुश्किल से 10 प्रतिशत शिकायतें ही सही पाई गई।
ग्रामीणों का पलायन रोकने और अपनी ही पंचायत में 100 दिन का काम दिलवाने वाले नरेगा एक्ट की साख को शिकायती लोग बट्टा लगा रहे हैं। नरेगा में हर ग्राम पंचायत क्षेत्र में विकास काम करवाए जा रहे हैं।
अब तक जिले में 733 काम पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 2628 काम प्रगति में हैं। 3361 कामों में ही 511 शिकायतें आ गई। 339 मामलों की पूरी हुई जांच में सिर्फ 35 मामलों में आरोप सही पाए गए। 304 मामलों में या तो शिकायतकर्ता ही फर्जी पाए गए या उनके आरोप झूठे निकले।
फर्जी शिकायतों से जहां सरपंच और सचिव पर छींटे उछल रहे हैं, वहीं जांच के नाम पर सरकारी मशीनरी की ऊर्जा व हजारों रुपए खर्च होने के बाद भी नतीजा सिफर है। झूठी शिकायत करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होने से इसी बहाने लोग अपना हित साधने में भी लगे हुए हैं।
शिकायतकर्ता नहीं मिले, कहीं दबाव में लगे आरोप
नरेगा कार्यो की शिकायतों में ऐसे एक दर्जन से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें जिसनाम से शिकायत की गई उस नाम का आदमी संबंधित ग्राम पंचायत में ही नहीं है। कुछ मामलों में अधिकारियों, डाक विभाग और सरपंच सभी को आरोप के घेरे में ले लिया। दो माह की जांच के बाद आरोपी ने लिख कर दे दिया कि उसने राजनेताओं के दबाव में शिकायत कर दी थी।
शपथ पत्र पर देनी होगी शिकायत
राज्य के पंचायती एवं ग्रामीण विकास मंत्री भरत सिंह ने बताया कि शिकायतों की जांच में अधिकारियों का काफी समय लगता है। जांच में विभाग अधिकारियों के साथ ही तहसीलदार, एसडीएम, एसडीओ,बीडीओ,एक्सईएन और एईएन स्तर के अधिकारियों का समय भी जाया होता है।
उसके बाद शिकायत झूठी निकलती है तो ऐसे में धन और समय दोनों की बर्बादी होती है। इसलिए शिकायत अब शपथपत्र पर ली जाएगी। ताकि शिकायतकर्ता की भी जवाबदेही तय होगी।










