अमावस्या पर श्रद्धा का मेला
भीलवाड़ा. कहते हैं कि पन की जड़ पाताल में है, इसी मान्यता के चलते सोमवार को सोमवती अमावस्या पर मंदिरों में दिनभर पूजा-अर्चना व दान-पुण्य करने वालों का तांता लगा रहा।
सोमवती अमावस्या पर दान पुण्य को फलदायी मानते हुए सुबह से गायों को चारा डालने व गरीबों को भोजन कराने के साथ ही अनाज दान करने का क्रम चलता रहा। शिवालयों में सुबह से भोले बाबा का अभिषेक करने वालों का आना-जाना लगा रहा।
कोई पुष्प तो कोई दूध तथा कोई आक-धतुरा चढ़ा भगवान आशुतोष को प्रसन्न करता रहा। इस दिन के धार्मिक महत्व को देखते हुए कई श्रद्धालु पुष्कर व मातृकुंडिया पहुंचे तथा पवित्र सरोवरों में डुबकी लगाई। सुबह से श्रद्धालुओं के आगमन से मंदिरों में दिनभर चहल-पहल रही। फूल मालाएं, आक-धतुरा, अगरबत्ती व प्रसाद बेचने वालों का भी जमवड़ा लगा रहा।
तिलस्वां व त्रिवेणी में लगाई डुबकी
इस दिन दान-पुण्य के साथ पवित्र सरोवरों में स्नान की भी महत्ता है। सुबह से जिले के त्रिवेणी संगम व तिलस्वां महादेव कुंड में डुबकी लगाने वालों का तांता लगा रहा। दिनभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहने से यहां मेले सा माहौल रहा।
होती रही कथा व परिक्रमा
महिलाओं ने व्रत-उपवास किए तथा मंदिरों में पूजा-अर्चना कर कथाएं सुनी। बड़ा मंदिर, दूदाधारी गोपाल मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, सत्यनारायण मंदिर व चारभुजानाथ मंदिर में पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा। यहां महिलाओं ने भगवान की परिक्रमा कर कथाएं सुनी। शिवालयों में भी दूध व जल से अभिषेक हुए।
तिलस्वां में उमड़ा श्रद्घा का सैलाब
जन आस्था के केंद्र तिलस्वां महादेव मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र कुंड में डुबकियां लगाकर भगवान के दर्शन किए। अलसुबह से ही कुंड में स्नान के लिए पैदल जातरुओं के झुंड मंदिर पहुंचने लगे थे।
मंगला आरती के पश्चात भगवान तिलस्वांनाथ के जयकारों से परिसर गूंज उठा। राज आरती के बाद भीड़ बढ़ने लगी, शाम तक मेले-सा माहौल रहा। महंत गोपाललाल पाराशर ने बताया कि अमावस्या होने से श्रद्धालुओं में दान पुण्य की होड़ मची रही।
कुंड कीपाल पर रसोई बनानेवालों की भीड़ रही वहीं मेले में लगी दुकानों पर ग्रामीणों ने जमकर खरीदारी की। मध्यप्रदेश के मालवा व हाड़ौती, खेराड़, बरड़ व मेवाड़ से बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचे।










