रसोई से ‘राज’ की ओर
सीकर. शहरी सरकार में इस बार महिलाओं का दबदबा तो तय है। करीब 50 फीसदी सीटों पर चुनाव के लिए उतरी महिलाओं की प्रोफाइल में कई रोचक पहलू सामने आ रहे हैं। सबसे खास यह है, चुनाव लड़ रही 36 महिलाओं में से ज्यादातर के पास भले राजनीतिक तजुर्बा नहीं हो पर वे सीधे रसोई से ‘राज’ करने की तैयारी में निकल पड़ी हैं।
आवेदन फार्म के साथ चुनाव अधिकारी के यहां प्रत्याशियों को दी गई जानकारी में रोचक मामले इतने ही नहीं हैं। एजुकेशन के गढ़ सीकर में चुनाव लड़ ही महिलाओं की एजुकेशन प्रोफाइल के हाल कुछ ठीक नहीं हैं। तमाम महिला उम्मीदवारों में 25 ठीक लिखी-पढ़ी हैं।
अच्छी बात यह है कि पूरी तरह निरक्षर कोई नहीं है। दो महिलाएं ग्रेजुएट, तीन पोस्ट ग्रेजुएट हैं। तीन महिला प्रत्याशियों ने बीएड की डिग्री भी ली हुई है। इसके अलावा तीन प्रत्याशियों ने अपनी प्रोफाइल में व्यापारी होने का उल्लेख किया है।
उल्लेखनीय है कि इस बार भाजपा व कांग्रेस की ओर से 40 महिलाएं चुनाव मैदान में उतरी हैं। पुरुष प्रत्याशी सबसे ज्यादा व्यापारी : पुरुष उम्मीदवारों की प्रोफाइल भी कम रोचक नहीं है।
सबसे अधिक व्यापारी चुनाव लड़ रहे हैं। पुरुष प्रत्याशियों की एजुकेशन की बात करें तो अधिकतर दसवीं कक्षा तक ही पढ़े लिखे हैं। जबकि दो एलएलबी, छह पीजी, एक बीएड और आठ ग्रेजुएट मैदान में हैं।
मैकेनिक, सेवानिवृत्त भी मैदान में
चुनाव के लिए इस बार सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्ति ले चुके शख्स भी मुकाबले में हैं। ऐसे पुरुष प्रत्याशियों की संख्या तीन है, जबकि प्राइवेट नौकरी कर रहे पांच लोग भी चुनाव लड़ रहे हैं। रिटर्निग आफिसर के यहां दाखिल पर्चो में दिए ब्योरों में इसके अलावा सात प्रत्याशियों ने खुद को श्रमिक बताया है।










