अगला लक्ष्य ‘बीजिंग 2010’
रींगस/खाटूश्यामजी. खाटूश्यामजी के मगनपुरा गांव के लोगों की खुशियों के अब पंख लग गए है। गांव में आज फिर खुशी का माहौल है। ताईवान से स्वर्ण पदक जीतकर सोमवार को जब अजरुन पुरस्कार विजेता खिलाड़ी बजरंग लाल ताखर गांव की धरती पर पहुंचा तो उसका सीना भी गर्व से फूल गया।
जानकारी के अनुसार इससे पहले ताखर 2003 में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता में रजत, चंडीगढ़ में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण, हैदाराबाद में आयोजित एशियन प्रतियोगिता में एक स्वर्ण व दो रजत, 2006 में श्रीलंका में आयोजित सेफ गेमों में दो स्वर्ण, एशियन गेमों में एक रजत, कोरिया में आयोजित प्रतियोगिता में एक स्वर्ण व औलम्पिक में क्र्वाटर फाइनल को पार किया था।
इसके बाद उन्होंने अब 2009 में ताईवान में आयोजित एशियान सीनियर व जूनियर नौकायन प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है। ताईवान में पदक जीतने के साथ ही उनके स्वर्ण पदकों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।
छठा स्वर्ण पदक जीतने की तैयारीरेतीले धोरों से निकलकर देश का नाम रोशन करने वाले बजरंगलाल ताखर की नजर अब देश के लिए छठे स्वर्ण पदक जीतने पर है। इसके लिए ताखर की नजर अब 2010 में बीजिंग में होने वाली 16 वीं एशियन नौकायन प्रतियोगिता पर टिकी हुई है।
इसके लिए वे दस घंटे से ज्यादा अभ्यास कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार सीकर के एसके कालेज में द्वितीय वर्ष की पढ़ाई के दौरान ही ताखर का आर्मी में चयन हो गया था। इसके बाद उन्होंने 2006 में हुए एशियन गेम में भी उन्होंने सिल्वर मैडल प्राप्त किया था।
स्वर्ण विजेता का स्वागत ताईवान में आयोजित एशियाई नौकायन प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाले बजरंग लाल ताºर का सोमवार को रींगस के खाटू मोड़ पर विभिन्न संगठनों की ओर से स्वागत किया गया।
इसके बाद ताखर का खाटूश्यामजी पहंचने पर अभूतपूर्व स्वागत किया गया। स्वागत समारोह स्थानीय हरियाणा धर्मशाला मे पशु चिकित्सक डा. लक्ष्मण सिंह बाजिया की अध्यक्षता मे रखा गया। समारोह मे पहंचने पर ताखर का माल्यापर्ण कर स्वागत किया गया।
कहां गया प्रशासन व खेल विभाग शेखावाटी का लाल बजरंग लाल ताखर देश के लिए अब तक पांच स्वर्ण पदक जीत चुका है। इस कामयाबी पर सरकार ने शेखावाटी के लाल को अजरुन पुरस्कार देकर खानापूर्ति हासिल कर ली। सोमवार को जब ताईवान से पदक जीतकर ताखर अपने जिले की सीमा में पहुंचा तो बधाई देने के लिए प्रशासन का एक भी अधिकारी नजर नहीं आया।
ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जब एक देश का एक नामी खिलाड़ी पदक जीतकर आ रहा है तो इसकी सूचना प्रशासन व खेल विभाग को क्यों नहीं मिली। हद तो यह है कि खेल विभाग व प्रशासन के किसी भी अधिकारी ने उन्हे फोन कर बधाई तक नहीं दी।
जानकारी के अनुसार ताखर दिल्ली से सवेरे बस मे सवार होकर वाया चंदवाजी चौंमू होते हुए रींगस पंहुचे। ताखर का कहना है कि सरकार खिलाड़ियों को मदद देकर तो प्रोत्साहन नहीं दे रही है, लेकिन बधाई देकर तो हौसला बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा कि मलाल होता है कि खिलाड़ी देश के लिए पदक जीत रहे है, और उन्हे कोई रिसीब करने वाला तक नहीं है।
राज्य सरकार सहायता नहीं देती स्वर्ण पदक विजेता ताखर ने बताया कि मैं देश के लिए खेलते है, लेकिन प्रदेश की सरकार ने कोई सहायता नहीं दी है। देश के अन्य राज्यों में स्वर्ण पदक जीतने वाले व अजरुन पुरस्कार खिलाड़ियों की सरकार दिल खोलकर सहायता कर रही है।
राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद भी किसी तरह की कोई सहायता नहीं देती है। ताखर ने बताया कि हरियाणा में मेरे स्तर के खिलाड़ी को वहां की्र सरकार ने जिला पुलिस अधीक्षक का पद व 35 लाख रूपए नगद देकर सम्मानित किया है। सरकार को कम से खिलाड़ियों की तैयारी व प्रतियोगिता में शामिल होने का खर्चा तो देना ही चाहिए।
सरकार खिलाड़ियों को जमीन देने की घोषणा करती रहती है, लेकिन अभी तक जमीन नहीं मिली है। यदि शेखावाटी के खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिले तो वे देश का नाम रोशन कर सकते है। प्रदेश में शेखावाटी ही एक ऐसा इलाका है, जहां दस खिलाड़ी अजरुन पुरस्कार जीत चुके है।
राजस्थान में भी हो नौकायान सुविधा ताखर ने भास्कर को बताया कि जयपुर के मानसरोवर क्षेत्र में ऐशियन गेम सन् 1982 में हुआ था। राज्य सरकार चाहे तो राजस्थान में नौकायान खेल का महत्व बढ सकता है। प्रदेश में नौकायन के खिलाड़ियों के लिए सरकार को सुविधाएं बढ़ानी चाहिए। नौकायन का देशभर में लगातार क्रेज बढ़ रहा है।
सुविधाओं में भेदभाव ताखर ने बताया कि देश में करीब 208 खेल खेले जा रहे है। जिनमें करीब 8 खेलों को बढावा मिल रहा है। प्रत्येक खिलाड़ी देश के लिए खेलता है। भारत में खिलाड़ियों के साथ भेदभाव हो रहा है। क्रिकेट के खिलाड़ियों को अनेक तरह कि सुविधाएं मिल रही है, लेकिन नौकायान के बारे में लोग अनजान है। साथ ही खिलाड़ियों को सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है।
बस यात्री भी नहीं पहचान पाए स्वर्ण विजेता को ताखर दिल्ली से सवार होकर चौमूं पहुंचा, वहां पर उसने झुंझुनूं आगार की बस में सवार होकर रींगस पहुंचे। ताखर के साथ बस में सवार सीकर निवासी रामसहाय महाजन, नवलगढ़ निवासी मंजू अग्रवाल, झुंझुनूं निवासी रामशरण यादव, रामदेव सिंह जाट आदि ने बताया कि उन्होंने एक अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी से अनुभव लेने का मौका खो दिया।
मिलने तक की अनुमति नहीं मिलती स्वर्ण पदक विजेता बजरंग लाल ताखर ने बताया कि देश के लिए खेलता हुं। पिछली बार सन् 2006 में दोहा में आयोजित हुए ऐशियन गेम में सिल्वर मेडल प्राप्त कर जयपुर पहुंचा। वहां पर मुख्यमंत्री से मिलने कि इच्छा हुई। लेकिन वहां पर मिलने कि अनुमति तक नही मिली। जिससे मन को ठेस पहुंची।










