Tuesday, November 17, 2009 07:54 [IST]  

danik bhaskarआकार लेने लगा घोड़ाखोज बांध

भास्कर न्यूज

ऋषभदेव. अगला मानसून मेहरबान रहा तो क्षेत्र में पानी की समस्या नहीं रहेगी। भूधर में आकार ले रही घोड़ाखोज लघु सिंचाई परियोजना यह संकेत दे रही है, जिसका काम इन दिनों युद्धस्तर पर हो रहा है। बांध का 60 फीसदी काम हो चुका है।



तहसील मुख्यालय से 14 किमी दूर भूधर में पहाड़ियों के बीच 12 फीट ऊंचाई तक बांध का आधे से ज्यादा काम हो चुका है। बांध की दीवार ऊपर से 6.65 मीटर रखी गई है, जबकि पैंदे की ओर यही चौड़ाई 30 मीटर तक है। फाउंडेशन के साथ इसे जल्दी ही लंबाई में जोड़ दिया जाएगा।



अभी एक ब्लॉक जुड़ना शेष है, जिस पर सवा सौ मजदूर व कारीगर लगे हैं। जल संसाधन विभाग के एईएन रघुनाथसिंह चौहान ने बताया कि योजना के तहत अगले साल जून तक काम खत्म होना है। डूब में आ रही 5.425 हैक्टेयर वन भूमि के प्रत्यावर्तन की स्वीकृति भी मिल गई है। उल्लेखनीय है कि उक्त परियोजना के तहत 15 करोड़ 44 लाख की प्रशासनिक स्वीकृति दो साल पहले जारी हुई थी।



फिर नहीं होगी पीने के पानी की किल्लत : जलदाय विभाग के अनुसार ऋषभदेव में साढ़े आठ लाख लीटर पानी की प्रतिदिन डिमांड है। विभाग ने अभी पांतरे सप्लाई की व्यवस्था कर रखी है, लेकिन इसमें भी सात लाख लीटर ही मिल पा रहा है। भूधर में बांध बनने के बाद पानी की किल्लत नहीं रहेगी। इसकी भराव क्षमता 100 एमसीएफटी (एक करोड़ लीटर) होगी।



इसमें 16 एमसीएफटी पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। भू जलस्तर बढ़ेगा : बांध भरने पर भूधर सहित थापडावली, गरड़ा व अंजलाइया की 425 हैक्टेयर पर भी सिंचाई हो सकेगी। इसके अलावा करीबी दर्जनों गांवों के स्रोतों में भी जलस्तर बढ़ेगा। इसे देखते हुए परियोजना को जनजाति बहुल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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