सुधर जाओ, वरना..
अमृतसर. नगर सुधार ट्रस्ट के अधिकारियों की मनमानियों और लोगों को पेश आ रही मुश्किलों पर विधायक अनिल जोशी ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सोमवार को ट्रस्ट कार्यालय पहुंचे जोशी ने बंद कमरे में अधिकारियों की क्लास लगाई।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर उन्हें भविष्य में कोई शिकायत मिली तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ मामलों को विधानसभा में उठाऊंगा। शहर में विधानसभा कमेटी का विजिट करवाया जाएगा, ताकि ट्रस्ट अधिकारियों की मनमर्जियां बंद हो सके।
सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के प्रशासक एमपी अरोड़ा की मौजूदगी में जोशी ने अधिकारियों को न सिर्फ इमानदारी का पाठ पढ़ाया, बल्कि श्रीगुरु रामदास जी की नगरी में काम करने का वास्ता तक दिया। उन्होंने कहा कि उनके पास लोगों की शिकायतें आ रही हैं, इसलिए पहले जो हो गया सो हो गया, भविष्य में ऐसा हुआ तो सहन नहीं किया जाएगा।
उदाहरण देते हुए जोशी ने कहा कि एक आदमी ने तो उन्हें यहां तक कह दिया है कि अगर ट्रस्ट से बिना पैसा दिए रजिस्ट्री करवा दें, तो एक कुष्ठ रोगी को ठीक करने के बराबर पुण्य मिलेगा। इसलिए अधिकारी खुद समझ लें तो अच्छा है, क्योंकि ट्रस्ट कार्यालय में अगर किसी को परेशानी हुई तो संबंधित अधिकारी दोषी होंगे। उन्होंने अधिकारियों को इंसानियत का भी हवाला दिया। रजिस्ट्रियों के लिए आयोजित कैंप के मंच से भी जोशी ने अधिकारियों को लोगों का काम करने को कहा।
अधिकारी मेरे पिता के हत्यारे
ट्रस्ट अधिकारियों की मनमर्जी का दंश झेल रही सतनाम कौर सिद्धू रजिस्ट्ररी कैंप में फफक कर रो पड़ी। ट्रस्ट अधिकारियों को अपने पिता का हत्यारा बताते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों की हरासमेंट से ही उनका देहांत हो गया।
101 सिटी सेंटर की रजिस्ट्ररी करवाने के लिए 1978 में उनके पिता अवतार सिंह सिद्धू लगे थे। पुराने रेटों पर रजिस्ट्ररी के समाचार के बाद उन्होंने कोशिशें तेज की, परंतु अधिकारियों की हरासमेंट के चलते जून 2009 में उनका देहांत हो गया। इसके बाद जुलाई 2009 से मैं खुद शनिवार और रविवार छोड़ रोजाना कार्यालय के चक्कर काट रही हूं। परंतु सिवाय हरासमेंट के कुछ नहीं मिला।
जोशी द्वारा मौके पर ही उनकी फाइल मंगवाकर वारिस मानने का लेटर और रजिस्ट्ररी की कार्रवाई को देख वह भावुक हो उठी और 31 साल बाद काम होने पर उनका शुक्रिया अदा किया। ट्रक स्टैंड स्कीम के नरिंदर ने आरोप लगाया कि व तीन माह से ट्रांसफर का केस लेकर घुम रहा है।
परेशान कौन कर रहा है, पर उन्होंने कहा कि एक हो तो उसका नाम लूं। रणजीत एवेन्यू के विजय कुमार ने बताया कि फाइन गलत लगने का केस लेकर वह चार साल से कार्यालय में आ रहा हूं। 15 जुलाई 2009 को उनका कम्प्लीशन भी पूरा हो गया, परंतु राजिस्ट्ररी नहीं की जा रही।










