अब रजिस्ट्री करवाना बहादुरी का कामन
अमृतसर. जमीन जायदाद के पंजीकृत होने वाले दस्तावेजों (रजिस्ट्रियों) को लेकर पंजाब सरकार के राजस्व, पुनर्वास और डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग की ओर से जारी आदेश पर पंजाब में बवाल मचना शुरू हो गया है।
पंजाब के सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में यह आदेश लागू हुआ तो किसी के लिए भी जमीन के एक छोटे से टुकड़े की भी रजिस्ट्री कराना आसान नहीं होगा। सोमवार को अमृतसर के रजिस्ट्री कार्यालयों में भी यह आदेश लागू ही किया गया था कि रजिस्ट्रियां करवाने पहुंचे लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
उन्होंने सरकार व प्रशासनिक
अधिकारियों की आलोचना शुरू कर दी। गुस्साए लोग पहले डीआरओ सतपाल गर्ग के आफिस फिर डीसी काहन सिंह पन्नू के खुले दरबार में पहुंचे। पन्नू ने लोगों की परेशानियों को देखते हुए पंजाब की एफसीआर (फाइनांस कमिश्नर रैवेन्यू)) आफिस में संपर्ककर नए आदेश को अमृतसर जिले में फिलहाल अगले आदेश तक के लिए टलवा दिया। इससे पहले कई लोग बिना रजिस्ट्री करवाए निराश लौट गए। पहले हाफ तक तो पुरानी स्थिति में रजिस्ट्रियां हुई ही नहीं, किंतु डीसी द्वारा राहत दिलवाने के बाद देखते ही देखते रजिस्ट्री कार्यालयों में भीड़ जमा हो गई।
क्या है नया आदेश
पंजाब सरकार ने यह आदेश पंजीकृत होने वाली रजिस्ट्रियों के इंतकाल संबंधी कानूनी एवं विभागीय प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए जारी किया है, लेकिन यह प्रक्रिया रजिस्ट्रियां करवाने वालों को कितना उलझा सकती है, इसका अनुमान सरकार और आदेश जारी करने वाले प्रशासनिक अधिकारी शायद नहीं जान रहे।
नए आदेश में कहा गया है कि पंजीकृत होने वाले किसी भी दस्तावेज रजिस्ट्री की तीन प्रतियों के साथ खसरा नंबर से संबंधित जमाबंदी, गिरदावरी और मसावी की तीन तीन तसदीकशुदा प्रतियां लगानी होंगी। रजिस्ट्री कार्यालय दूसरे दिन एक सेट संबंधित हलके के रैवेन्यू पटवारी को भेजेगा, जो इंतकाल दर्ज करने से पहले दोनों पक्षों से 15 दिनों में ऐतराज हासिल करने के लिए गांव के चौकीदार के जरिए उन्हें सूचना देगा। ऐतराज न मिलने पर पटवारी इंतकाल दर्ज कर सर्किल रैवेन्यू अफसर से इंतकाल मंजूर करवाएगा और 25 रुपए फीस लेकर संबंधित पक्ष के घर इंतकाल मंजूर होने संबंधी जमाबंदी की प्रति भिजवाएगा।
क्या है मसावी
मसावी ऐसा रिकार्ड होता है, जिसमें इलाकास्तर पर खसरा नंबरों का नक्शा बना होता है। इसके जरिए हर खसरा नंबर के आधार पर जमीन को बड़ी आसानी से ट्रेस किया जा सकता है।
आसान नहीं मसावी की कापी ले पाना
लोगों की सुविधा के लिए जिलास्तर पर सुविधा केन्द्र खोले गए हैं, किंतु अक्सर देखा जाता है कि किसी भी प्रकार की तसदीक शुदा कापी हासिल करने के लिए लोगों को कई दिनों तक चक्कर काटने पड़ते हैं। मसावी की बात की जाए तो महीनों तक कर्मचारी ट्रेस तक नहीं कर पाते। सरकार ने जो मसावी की तीन तीन तसदीकशुदा प्रतियां जरूरी की हैं, ऐसी स्थिति में तो लोगों को रजिस्ट्री करवाने के लिए न जाने कितने दिन या महीनों इंतजार करना पड़ेगा।
पार्षदों की तुलना गांव के चौकीदार से
आदेश पत्र में कई प्रकार की खामियां दिख रही हैं, किंतु अधिकारी जनहित में अपने उच्चधिकारियों से बात करना भी उचित नहीं समझते। आदेश संबंधी रैवेन्यू अधिकारियों को बताया गया कि ऐसे लगता है कि यह ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ही है, क्योंकि शहरों में चौकीदार नहीं होता तो एक अधिकारी का कहना था कि शहरों में पार्षद तो हैं ना। शहरों में बिल्ट अप प्रापर्टी की गिरदावरी या मसावी की प्रतियां लगाने पर पाबंद करने के सरकार के फैसले से आम जनता संतुष्ट नहीं दिख रही है।










