छात्रों को एटीकेटी का इंतजार
ग्वालियर. जीवाजी यूनिवर्सिटी में परीक्षा कार्यक्रम गड़बड़ा गया है। अभी तक सेमेस्टर व अलाउ टू कीप टर्म (एटीकेटी) की परीक्षाएं नहीं हो सकी हैं। पूरक परीक्षाएं भी लेट हो चुकी हैं जबकि ये सितंबर तक हो जानी चाहिए थी। छात्र-छात्राएं परीक्षाओं के इंतजार में हर रोज अखबारों के पन्ने पलट रहे हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं में भी नहीं बैठ पा रहे हैं।
जेयू में हर साल मुख्य परीक्षा का रिजल्ट निकलते ही सितंबर में पूरक परीक्षाएं करा ली जाती हैं। एक महीने के भीतर उनके परिणाम भी आ जाते थे और मुख्य परीक्षा की तैयारियां शुरू हो जाती थीं। इस साल सभी कोसरे की मुख्य परीक्षाओं के परिणाम समय पर निकलते रहे लेकिन पूरक परीक्षा नहीं हो सकी। इसके पीछे शिक्षकों की हड़ताल प्रमुख वजह बताई जा रही है।
लेट होंगी सेमेस्टर व एटीकेटी परीक्षाएं: नगरीय निकाय चुनाव की तिथियां घोषित होने से सेमेस्टर व एटीकेटी परीक्षाएं और आगे बढ़ सकती हैं। निकाय चुनाव में स्टाफ की ड्यूटी लगने के कारण ये दिसम्बर बाद ही हो सकेंगी। परीक्षाएं लेट होने से मार्च में होने वाली मुख्य परीक्षाओं पर भी असर पड़ सकता है।
अभी तक मुख्य परीक्षा के लिए प्राइवेट फार्म भी नहीं भरे जा सके हैं। पूरक परीक्षा का रिजल्ट निकलने के बाद ही छात्र अगली कक्षा के लिए प्राइवेट फार्म भर सकते हैं। पूरक के वे छात्र-छात्राएं सबसे ज्यादा असमंजस में हैं, जो अगली कक्षा में अस्थायी प्रवेश ले चुके हैं।
पूरक परीक्षा होगी दो महीने लेट जेयू की पूरक परीक्षाएं सितम्बर में हो जाती हैं लेकिन इस साल लेट हो गईं। जेयू ने सोमवार को पूरक परीक्षा का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। पूरक परीक्षाएं (बीए, बीएससी, बीकॉम प्रथम, द्वितीय व तृतीय वर्ष) 25 से 27 नवम्बर तक कराई जाएंगी। छात्र पूरक परीक्षा के फार्म 20 नवम्बर तक कालेज में जमा कर सकते हैं।
परीक्षा प्रणाली को लेकर छात्रों में भ्रम यूनिवर्सिटी की परीक्षा प्रणाली बदलने के साथ ही छात्र नई परेशानी में फंस गए। पुरानी परीक्षा प्रणाली से प्रथम वर्ष उत्तीर्ण होने के बाद वे इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उन्हें द्वितीय वर्ष की परीक्षा किस प्रणाली के तहत देनी होगी, सेमिस्टर या पुरानी प्रणाली।
इस बारे में कालेजों के प्राचार्य भी भ्रम में हैं। वर्ष 2007-08 में वार्षिक प्रणाली से हजारों छात्रों ने प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था। उन्होंने इस साल परीक्षा दी लेकिन कुछ छात्र फेल हो गए। इसके पश्चात फेल छात्र वर्ष 2008-09 की परीक्षा में भूतपूर्व छात्र के रूप में शामिल हुए और परीक्षा पास कर ली।
यहीं से उनके सामने आगे की पढ़ाई को लेकर संकट खड़ा हो गया। पुरानी परीक्षा प्रणाली के अनुसार ऐसे छात्र द्वितीय वर्ष में नियमित प्रवेश ले सकते हैं लेकिन सेमेस्टर प्रणाली लागू होने से स्थिति स्पष्ट नहीं है। छात्रों के अलावा कालेजों के प्राचार्य भी जेयू के कई बार चक्कर काट चुके हैं लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।










