अस्पताल ने किशोरी को बनाया फुटबाल
कोटा. एमबीएस अस्पताल में टीबी से ग्रसित एक किशोरी का उपचार करने के बजाय मेडिसिन, टीबी और सर्जरी विभाग इधर—उधर भेजते रहे। आखिरकार तीन दिन बाद मेडिसिन विभाग ने उसका इलाज शुरू किया।
किशोरी के पिता मनोज शर्मा ने बताया कि शनिवार को उसकी पुत्री 13 वर्षीय गुंजन की तबीयत बिगड़ने पर उसे एमबीएस अस्पताल मंे भर्ती कराया, लेकिन उसे किसी ने नहीं संभाला। उसके घाव पर भी मरहम पट्टी परिजनों ने ही की। लगातार उसकी स्थिति गंभीर बनती चली गई।
आखिकार पिता को इलाज के लिए किसी से कहलवाना पड़ा, तब कहीं जाकर मेडिसिन विभाग की नींद टूटी और सोमवार से उसका इलाज शुरू हुआ। मनोज शर्मा ने आरोप लगाया कि उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से बेटी के इलाज में कोताही बरती गई। महिला मेडिकल वार्ड मंे भर्ती गुंजन की आंत मंे पस पड़ गया था। इसके चलते 24 जुलाई को मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में उसका ऑपरेशन किया गया था।
टीबी और सर्जरी विभाग को रैफर किया था
किशोरी को टीबी और सर्जरी विभाग को रैफर किया था, लेकिन दोनों ने इलाज की आवश्यकता नहीं बताई। सोमवार दोपहर को उसके लिए कॉल आई और उसके बाद से इलाज शुरू कर दिया गया। — डॉ. दीप्ति शर्मा
इस संबंध में अभी तक किसी ने शिकायत नहीं की है। —डॉ. आरके आसेरी, एमबीएस अस्पताल अधीक्षक










