कठपुतलियों का हर तरफ विरोध
ग्वालियर. नगरीय निकायों के चुनाव में अपनी पत्नी, मां या भाभी के लिए टिकट मांग रहे नेताओं के मंसूबे आसानी से पूरे नहीं होंगे। भाजपा हो या कांग्रेस, दोनों ही दलों में ऐसे नेताओं के खिलाफ माहौल बनने लगा है।
टिकट के लिए दावेदारी कर रहे कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेतृत्व के सामने खुलकर कहना शुरू कर दिया है कि अगर कठपुतलियों (नेताओं के परिवार की महिलाओं) को टिकट वितरण में प्राथमिकता दी गई तो इसका संदेश ठीक नहीं होगा।
भाजपा और कांग्रेस के भीतर कार्यकर्ताओं के बीच से उठ रहे इस तरह के स्वर के पीछे टिकट के लिए दावेदारी करने वाले ऐसे चेहरे हैं, जिन्हें कार्यकर्ताओं ने तो क्या, पार्टी के पदाधिकारियों ने भी किसी जन आंदोलन या संगठन के कार्यक्रम में कभी नहीं देखा है।
निकाय चुनाव के मौसम में कार्यकर्ता ऐसे चेहरों की दावेदारी पर सवाल उठा रहे हैं। इसके पीछे उनका तर्क है- अगर ऐसे लोगों को ही टिकट मिलना है तो फिर संगठन के लिए मेहनत करने वालों का क्या होगा?
टिकट की दावेदारी कर रहे कार्यकर्ताओं के इस सवाल की भनक भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के वरिष्ठ नेताओं को है। इसके मद्देनजर वे चुनावी तैयारियों के लिए बनाई जा रही रणनीति में इस पर गंभीरता से विचार कर ऐसा फामरूला तय करने की कोशिश में हैं, जिससे पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को नाराजगी का मौका न मिले।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने तो पर्यवेक्षकों और जिला अध्यक्षों की बैठक में तय की गई गाइड लाइन में इस संबंध में स्पष्ट कर दिया है कि मां, भाभी या पत्नी के लिए टिकट मांग रहे नेताओं की दावेदारी पर तभी गौर किया जाएगा, जब संबंधित वार्ड में उम्मीदवारी के लिए पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता न हो। याद रहे कि पूर्व में महिला कांग्रेस की ओर से भी कई बार विरोध दर्ज कराया जाता रहा है।










