बरसते पानी में निकले महाकाल
उज्जैन. सोमवती अमावस्या पर्व होने से सवारी में श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ थी। सवारी मार्ग पर भक्तों ने राजा महाकाल का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। रजत पालकी में विराजित भगवान महाकाल (मनमहेश) के दर्शन को हर कोई लालायित दिखाई दिया। मंदिर में पूजा-अर्चना के पश्चात सवारी शाम ४ बजे महाकाल मंदिर से निकली और गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी, रामानुजकोट मार्ग से होकर शाम ५ बजे रामघाट पहुंची।
यहां पुजारियों ने शिप्रा के जल से बाबा का अभिषेक किया। आधे घंटे पूजन के पश्चात सवारी गणगौर दरवाजे से होकर कार्तिक चौक, सत्यनारायण मंदिर, ढाबारोड, छत्रीचौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी चौराहा होते हुए शाम ७ बजे पुन: महाकाल मंदिर पहुंची।
भीड़ नियंत्रण के लिए पालकी के आसपास पुलिस जवान रस्से का घेरा बनाकर चल रहे थे। सवारी में पंडितों की मंडली, घुड़सवार दल, पुलिस बैंड, सशस्त्र जवानों की टुकड़ी, सेवादल, स्काउट गाइड, मानसेवी सदस्य भी शामिल थे।
सवारी के नजारे: ठ्ठ कलेक्टर अजातशत्रु, एसपी सतीश सक्सेना रामघाट पर पूजन के समय खड़े रहकर व्यवस्था पर नजर रखे हुए थे।
इंदौर के दर्शन छाबड़ा की ओर से रामघाट पर शरबत वितरण किया गया जिसका पुलिसकर्मियों ने स्वाद चखा।
सवारी के साथ पांच हजार से अधिक श्रद्धालु थे। पुलिस को भीड़ नियंत्रण में मशक्कत करनी पड़ी।
नदी क्षेत्र में सवारी के दौरान एक कार चालक के नो-व्हीकल जोन में घुसने पर पुलिस ने एक हजार रुपए का चालान बनाया।
सवारी की व्यवस्था संभालने के लिए अतिरिक्त बल भी लगाया गया।
ग्रामीण श्रद्धालु जय महाकाल का उद्घोष करते पालकी के आगे चल रहे थे।











