रक्तचित्रों से तिब्बत की आजादी का संदेश
रतलाम. चित्र सिर्फ कैनवास पर बनाई गई कृति भर नहीं है बल्कि यह एक मुल्क की आजादी के संदेश का दम भी भर सकता है। इन चित्रों में कलाकार की रक्त बूंदें हैं जो इन्हें अन्य से इतर बनाती हैं।
भोपाल के कलाकार महेश यादव ने तिब्बत की आजादी के लिए जागरूकता का बीड़ा उठाया है। महात्मा गांधी के सत्याग्रह की तर्ज पर उन्होंने भी सत्याग्रह अभियान शुरू किया है। यह अभियान २४ अक्टूबर से प्रारंभ हुआ और १क् मार्च को अरुणाचल प्रदेश के तवांग में इसका समापन होगा।
श्री यादव ने बताया १क् मार्च तिब्बत का परतंत्रता दिवस है। वे इस दौरान २४ राज्यों के विभिन्न शहर में जनजाग्रति का संदेश देंगे। ५क् साल पहले तिब्बत बफर स्टेट था। चित्रकार महेश ने भास्कर से खास मुलाकात में बताया तिब्बत को आजादी मिलने का सीधा लाभ भारत को मिलेगा। चीन ने तिब्बत पर अपना आधिपत्य जमा रखा है और इस कारण वह आसानी से भारतीय सीमाओं खासकर अरुणाचल प्रदेश में अपना दखल देता है।
चीन को आतंकवादी देश घोषित करें-श्री यादव बताते हैं कि वे भारत सरकार के जरिए संयुक्त राष्ट्रसंघ से मांग करेंगे कि चीन को आतंकवादी देश घोषित किया जाए। चीन से सभी तरह के संबंधों को भारत समाप्त करे।
६क्क् रक्तचित्र बनाए-श्री यादव अभी तक रक्त से ६क्क् पेंटिंग्स बना चुके हैं। उनका मानना है कि खून से बनाए गए चित्र सोई हुई संवेदनाओं को जगाते हैं। वे रक्त से कई संदेशों को भी लिख चुके हैं। ३८ बार रक्तदान भी कर चुके हैं। वे देश के कई हिस्सों में अपने रक्तचित्रों की प्रदर्शनी लगा चुके हैं।
दलाई लामा से तीन बार मुलाकात-तिब्बत की आजादी के लिए जनजाग्रति फैला रहे श्री यादव धर्मशाला में तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा से तीन बार मुलाकात कर चुके हैं। उनके मिशनों का प्रसारण अंतरराष्ट्रीय रेडियो स्टेशनों पर भी हुआ है।










