लाठी खाकर याद किया उदा देवी को
कौशाम्बी
दलित वीरांगना उदा देवी को याद करने के लिए सोमवार को कौशाम्बी जिले में सराय अकील थाना क्षेत्र के नंदा का पुरा में हजरों लोग इकट्ठे हो गए। प्रशासन की ओर से इस जनसभा को रोकने के लिए लगाई गई धारा 144 एक दिन परू पुलिसिया दमन भी लोगों को एकजुट होने से नहीं रोक सकी। शहीद उदा देवी पासी यादगार समिति की ओर से आयोजित जनसभा में लोगों ने शहीद उदा देवी को याद करते हुए दमन करने वाली सरकार को उखाड़ फेंकने की कसम खाई।
प्रतिबंध के बाद भी सभा करने पर अडिग ग्रामीणों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया जिसमें करीब ३0 लोग घायल हो गए। पुलिस का यह हमला भी लोगों को दलित वीरांगना को याद करने से नहीं रोक सका और सोमार को कौशाम्बी के अला मऊ, चित्रकूट, इलाहाबाद के दूर-दराज के गावं से ट्रैक्टर-ट्रालियों में भर कर हजरों मजदूर-दलित कामगार जनसभा में पहुंचे। कौशाम्बी प्रशासन ने जनसभा स्थल को छावनी में तब्दील कर दिया था। पुलिस ने तिल्हापुर मोड़, पुरखास, गढ़ा, सराय अकील, प्रतापपुर व लालापुर में करीब १000 मजदूरों को लाठीचार्ज कर बिखेरने का प्रयास किया और सभा में शामिल होने से रोके रखा। इसके बाजूद इस जनसभा में पांच हजर से ज्यादा लोग एकत्रित हुए। सभा स्थल पर मेले जसा माहौल नजर आया। लोगों के उत्साह को देखकर पुलिस भी कुछ करने की हिम्मत नहीं जुटा सकी।
जनसभा को संबोधित करते हुए समिति के संयोजक मजदूर नेता सुरेश चन्द्र ने कहा कि मायाती सरकार अंग्रेजों के नक्शेकदम पर चलते हुए राज्य में खेती की जमीने बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को सौंप रही है। गंगा एक्सप्रेस वे , जिसे जेपी ग्रुप बना रहा है, उसमें ३0 फीसदी शेयर विदेशी कम्पनियों का है। बीज, खाद, खनन ऊज्र की कम्पनियों से लेकर उपभोग के सामानों में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का वर्चस्व है और स्थानीय रोजगार कारीगर बर्बाद हो रहे हैं।अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 1857 में लड़ते हुए इसी विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहीद हुईं है। उनकी रियासत के लोग ऐसी और भी शहादत के लिए तैयार हैं।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी माले न्यू डेमोक्रेसी के राज्य सचि डाक्टर आशीष मित्तल ने कहा कि उदा देवी पहली स्तंत्रता संग्राम दलित महिला नायिका थीं। उन्होंने लुटेरे अंग्रेजों को भारत से बाहर भगाने के लिए अपनी जान दी। उस समय अंग्रेज जीत गए क्योंकि दलाल जमींदारों ने उनका साथ दिया। जनसभा की अध्यक्षता कर रहे रामलाल भारतीय ने कहा कि देश में घमासान कर रहे काले अंग्रेज नहीं चाहते कि दलित-मजदूर आजदी के नायकों से प्रेरणा लें। वह केवल उनकी मूर्तियां सजकर उन पर माफियाओं, जमींदारों दलालों से माल्यार्पण कराना चाहते हैं। सभा में सांस्कृतिक मंच के कामता, सुदामा, बोधा, गेंदालाल तथा दीपक नें क्रांतिकारी गीत गाए।










