राहु—केतु ने बदली चाल
राहु व केतु ने अट्ठारह साल बाद मंगलवार को धनु व मिथुन में प्रवेश के साथ ही अपनी चाल बदली। ज्योतिषियों के मतानुसार दोनों ग्रहों का नीच राशिगत होना सभी जातकों के लिए नकारात्मक प्रभाव वाला रहेगा।
पंडित बंशीधर जयपुर पंचांग निर्माता पंडित दामोदर शर्मा के अनुसार पूर्व में मकर राशि में चल रहे राहु ने धनु में और कर्क राशि में चल रहे केतु ने मिथुन में दोपहर बाद 12 बजकर 2 मिनट पर प्रवेश किया। इससे लगभग सभी राशियों के जातकों में असामंजस्य की भावना पनपेगी।
ज्योतिषियों के मुताबिक राहु के राशि परिवर्तन के साथ ही एक तरफ राहु—गुरु की युति के फलस्वरूप चल रहा चांडाल योग समाप्त हुआ। वहीं केतु—मंगल की युति भी खत्म हुई। दूसरी ओर राहु केतु के राशि परिवर्तन के साथ ही मंगल राहु का षडाष्टक योग व शनि राहु का दशम चतुर्थ संबंध शुरू हुआ।
यह दोनों योग संवत 2066 के अंत तक रहेंगे। वर्तमान में संवत्सर की प्रवेश कालिक कुंडली में तुला लगA है लगA से तृतीय भाव में राहु का आना राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में अनेक दृष्टिकोणों से शुभ फलदायक रहेगा। लेकिन 26 मई 2010 तक राहु मंगल का षडाष्टक योग अशुभफलदायक रहेगा। यह योग कुंभ,कर्क और तुला राशि के लिए शुभ रहेगा।










