अटल खेल परिसर : सही मैनेजमेंट से बनेगी बात
इंदौर. खेल गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए तीन साल पहले बने अटल खेल परिसर में खेल गतिविधियां ठप पड़ी हैं। खेल विभाग और नगर निगम के बीच झूल रहे इस खेल परिसर में अब तक स्वीमिंग पूल ही चालू नहीं हो पाया है। लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी न यहां स्तरीय कोच है न सुरक्षा की कोई व्यवस्था।
खेल परिसर में जितने भी टूर्नामेंट या खेल गतिविधियां हो रही हैं वे भी निजी संस्थाएं किराया देकर करा रही हैं। केंद्र व राज्य सरकार द्वारा तैयार इस परिसर में दो साल पहले अटल खेल महाकुंभ हुआ था लेकिन अब वह भी बंद हो गया है।
यहां के मस्टर कर्मचारी ही बच्चों को खेलों का प्रशिक्षण दे रहे हैं, जिसके एवज में उनसे रुपए भी वसूल रहे हैं। लापरवाही के चलते यहां बने ग्राउंड भी खराब हो रहे हैं। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।
स्वीमिंग पूल में पानी साफ करने की मशीन भी खराब हो चुकी है। पार्षद मुन्नालाल यादव बताते हैं स्वीमिंग पूल के चार बोरिंग फेल हो गए हैं। लाइन डालने का काम शुरू हुआ लेकिन वह छोटी पड़ गई। काम पूरा होते ही हम स्वीमिंग पूल चालू कर देंगे।
हम मैंटेनेंस के लिए तैयार हैं
खेल एवं युवक कल्याण विभाग अधिकारी राजेश शाक्य कहते हैं अटल खेल परिसर के लिए हमने महापौर को लिखा था और एमआईसी में खेल विभाग को सौंपने के लिए प्रस्ताव भी पास हुआ था। बावजूद इसे खेल विभाग को देने के लिए मना कर दिया गया। हमें इसका कोई कारण भी नहीं बताया गया। हम तो वहां 28 से 30 लाख रुपए खर्च कर मैंटेनेंस के लिए भी तैयार हैं।
तो मिल सकता है खेल विभाग को परिसर
नगर निगम के सिटी इंजीनियर हंसकुमार जैन कहते हैं स्वीमिंग पूल बन तो गया है लेकिन चालू नहीं हुआ है। दरअसल यहां रनिंग मैंटेनेंस सिस्टम नहीं बन पा रहा है। वर्तमान में कहीं से भी परिसर के लिए पैसा नहीं आ रहा है और मैनेजमेंट के बिना इसका विकास भी संभव नहीं।
फंड तो जनरेट हो भी जाएगा लेकिन असली मुद्दा मैनेजमेंट हैं। हम चाहते हैं कोई खेल संस्था आगे आए। जब उनसे खेल विभाग को देने की बात पूछी गई तो उन्होंने बताया कि खेल विभाग यदि अटल खेल परिसर चाहता है तो कमिशनर से बात करें।
हम परिसर की ऑनरशिप तो हस्तांतरित नहीं कर सकते। कॉपरेरेशन के साथ खेल विभाग बैठकर नीति बनाए जिसमें फंड, मैनेजमेंट सभी बातें शामिल हों। इसके बाद यदि वह चाहता है तो बात आगे बढ़ सकती है।










