हाइड्रो इंजी. कॉलेज को मिली जमीन
शिमला. प्रदेश में लगने वाले हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स के लिए तकनीशियन तैयार करने के लिए प्रदेश में खुलने वाले पहले हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए जमीन की तलाश पूरी हो गई है। कॉलेज के लिए बिलासुपर की बंदलाधार में जमीन फाइनल की गई है।
बंदलाधार में 100 बीघा के करीब सरकारी भूमि उपलब्ध है, जिसमें से 50 बीघा भूमि कॉलेज को देने की तैयारी हो चुकी है। इस पहले कॉलेज का निर्माण प्रदेश सरकार नेशनल हाइड्रो पावर कॉपरेरेशन (एनएचपीसी) और नेशनल थर्मल पावर कॉपरेरेशन (एनटीपीसी) की मदद से करने जा रही है।
इस सिलसिले में प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की दिल्ली में सेंट्रल मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर पावर के साथ बैठक हुई थी, जिसमें एनएचपीसी के एमडी व एनटीपीसी के सीएमडी भी उपस्थित थे। अप्रैल में केंद्र की ओर से हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने के लिए प्रदेश सरकार को हरी झंडी मिल गई थी।
जमीन की तलाश पूरी होने और जमीन संबंधी सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अब यह प्रदेश सरकार के हाथ है कि इस कॉलेज का शिलान्यास कब किया जाए। उम्मीद है कि नए साल के शुरू होने से पहले इस कॉलेज का नींव पत्थर रख दिया जाएगा। विशेष सचिव एवं निदेशक तकनीकी शिक्षा एसएस गुलेरिया ने कहा, हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए बिलासपुर की बंदलाधार में साइट फाइनल कर दी है।
इंजीनिय¨रग कॉलेजों में हाइड्रो की पढ़ाई
प्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश में संचालित किए जाने वाले इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी हाइड्रो पावर जनरेशन की पढ़ाई शामिल होगी। इतना ही नहीं प्रदेश में चलने वाली सरकारी आईटीआई संस्थानों के सलेबस में भी हाइड्रो पावर जनरेशन की स्टडी को शामिल किया जाएगा। तकनीकी निदेशालय की ओर से इस बारे में तैयारी कर ली गई है।










