जोश से आए पार्षद मायूस हो लौटे
अम्बाला. सदर नगर परिषद में शामिल होने वाली 135 कालोनियों के सर्वे को पास कराने के लिए मंगलवार को बुलाई गई मीटिंग अधिकारी नहीं होने से मीटिंग अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। अधिकारियों की तरफ से नोटिस 3 बजकर 34 मिनट पर लगाया गया कि मीटिंग स्थगित कर दी जाती है।
मीटिंग में नप अधिकारियों का न आने का कारण सिटी में कष्ट निवारण समिति की मीटिंग होने का हवाला दिया गया। इससे पार्षद गुस्सा हो गए और नप अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। पार्षद कमल किशोर जैन, नरेंद्र बंगाली व औंकार नाथी ने कहा कि नप अधिकारियों ने अपने चेहतों को खुश करने के लिए एरिया से ज्यादा सर्वे कर दिया है।
कई कालोनियों में खाली प्लाट नहीं दिखाए तो कहीं में मकान ज्यादा दिखा दिए। इसके अलावा भी मोटी-मोटी खामियां सर्वे रिपोर्ट में दी हुई है। 19 गांव की 135 कालोनियों का सर्वे नप अधिकारियों ने प्राइवेट कंपनी द्वारा कराया गया है। भू-माफिमा को मोटा मुनाफा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया है। सर्वे को पास कराने को लेकर अधिकारी नहीं आ रहे हैं।
नक्शे एफेडेविट के साथ होंगे पास
पार्षदों ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट में गोलमाल किया गया है। जब तक 135 कालोनियों के नक्शे नहीं दिए जाएंगे तब तक सर्वे प्रस्ताव को सदन में पास नहीं करेंगे। पार्षद नरेंद्र बंगाली, कमल किशोर जैन ने कहा कि बगैर नक्शे, एफेडेविट के हम कैसे मान ले कि सर्वे सही है।
किसी विशेष व्यक्ति को लाभ पहुंचाने वाला काम नहीं किया जाएगा। नियमों की पालना व नक्शे, एफेडेविट लेकर सदन में सर्वे प्रस्ताव पास किया जाएगा। पार्षदों ने मांग की है कि सर्वे रिपोर्ट गलत करने वाले अधिकारी व प्राइवेट कंपनी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
समय कम, काम करने की जरूरत
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर नीलम शर्मा को राहत दी है। कांग्रेसी पार्षदों का तर्क है कि समय कम है और सभी को मिलकर काम करने की जरूरत है। नप ईओ, सचिव के बगैर चल रही है। जिस कारण शहर के लोग परेशान है।
समय कम, काम करेंगे
कांग्रेसी पार्षद हीरालाल यादव कहते हैं कि नगर परिषद के चुनाव का समय कम रह गया है। अब एक दूसरे के विरोध करने की जरूरत नहीं बल्कि मिलकर विकास कराने की जरूरत है। पार्षद डिंपल मित्तल का कहना है कि हाईकोर्ट का निर्णय मान्य है। अब अविश्वास प्रस्ताव लाने का ओचित्य नहीं बनता।
पाषर्षद रिया रतरा का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही की वजह से 28 पार्षदों का अपमान हुआ है। एक्ट के तहत नोटिस देने का कार्य नप अधिकारियों का था। 15 दिन की बजाए 9 दिन का नोटिस नप अधिकारियों ने जानबूझकर दिया है। जिस कारण हाईकोर्ट से नीलम शर्मा को जीत मिली है।
कांग्रेसी रूपचंद कहते हैं कि नीलम शर्मा के साथ पार्टी जो निर्देश देगी वही किया जाएगा। कांग्रेस के कहने पर काम करते रहेंगे। कांग्रेसी महेश कुमार गोयल का कहना है कि नप के चुनाव के चार माह रह गए हैं। अब नीलम शर्मा को अच्छा काम कराकर दिखाना चाहिए।
भाजपा पार्षद नरेंद्र बंगाली कहते हैं कि सभी पार्षदों से बातचीत करके अब फिर नीलम शर्मा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं। अधिकारियों की लापरवाही से नीलम शर्मा कोर्ट से जीत गई हैं। भाजपा पार्षद सुरेश गर्ग कहते हैं कि अविश्वास प्रस्ताव छह माह बाद ला सकते हैं। अब छह माह हो चुके हैं और अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश की जाएगी। भाजपा पार्षद कमल किशोर जैन कहते हैं हाईकोर्ट से नीलम शर्मा जीत गई है।
ये हुआ था 24 अप्रैल को
24 अप्रैल को सदर नगर परिषद में कांग्रेस समर्थित प्रधान नीलम शर्मा के खिलाफ 28-0 से अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया था। नतीजा घोषित होने बाद पार्षदों ने उप प्रधान सुधीर जयसवाल (कांग्रेस) को प्रधान की कुर्सी पर बैठा दिया। पार्षदों ने म्युनिसिपल एक्ट और पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए हाथ खड़े करके वोट करवाने की मांग की।
गुप्तपत्र से वोटिंग से पार्षदों ने वोट डाले। मतपत्रों की गिनती के बाद एसडीएम महावीर कौशिक ने नतीजे घोषित किए। बैठक में कांग्रेस के 9, भाजपा के 7, विकास परिषद के 5, इनेलो के तीन, बसपा का एक और तीन आजाद पार्षद मौजूद रहे। सदर नप के इतिहास में यह दूसरा मौका है जब किसी प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ था।










