हिमाचल में लागू नहीं होगा 85वां संविधान संशोधन
शिमला. हिमाचल प्रदेश में फिलहाल 85वें संविधान संशोधन का लाभ एससी/एसटी कर्मचारियों को नहीं मिल पाएगा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने पूर्व कांग्रेस सरकार के 7 सितंबर 2007 को जारी आदेशों को रद्द कर दिया है।
सरकार के इस फैसले से विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत 1 लाख सामान्य वर्ग के कर्मियों को फायदा मिलेगा। इन कर्मचारियों की प्रमोशन दो साल से रुकी हुई थी। सरकार सिर्फ इन्हें एडहॉक प्रमोशन दे रही थी, लेकिन इन्हें कोई वित्तीय लाभ नहीं मिल रहे थे। एडहॉक प्रमोट हुए कर्मचारियों पर डिमोशन का खतरा भी मंडरा रहा था। उप सचिव कार्मिक हरदेव सिंह ने इसके आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रमोशन की स्थिति अब पहले की तरह रहेगी।
क्या है 85वां संविधान संशोधन
अनुसूचित जाति/जनजाति के कर्मचारियों को पदोन्नति के समय विशेष लाभ देने का 85वें संविधान संशोधन में प्रावधान था। एससी/एसटी कर्मचारियों को ये लाभ 17 जून 1995 से मिलना था। हिमाचल प्रदेश सामान्य वर्ग कर्मचारी कल्याण महासंघ ने इसका कड़ा विरोध करते हुए इस अदालत में चुनौती दी थी।
हिमाचल में सबसे बड़ी परेशानी यह हो गई थी कि एससी/एसटी श्रेणी से कुछ साल पहले क्लर्क लगे कर्मचारी सात-आठ साल में सेक्शन ऑफिसर बन रहे थे जबकि 12—14 साल पहले बाबू के पद नियुक्त सामान्य श्रेणी के कर्मचारियों को कोई फायदा नहीं मिल रहा था।
पूर्व कांग्रेस सरकार ने 85वें संविधान संशोधन को लागू कर एक सियासी दांव खेला था। चुनाव पास थे। कांग्रेस की मंशा एससी/एसटी श्रेणी के लोगों के वोट बैंक पर कब्जा करना था। विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण बसपा के संयोजक मेजर विजय सिंह मनकोटिया इस मुद्दे को जोर—शोर से उठा रहे थे।
पूर्व सरकार ने एससी/एसटी श्रेणी के कोई ठोस आकंड़े जुटाए बगैर इसे लागू करने के आदेश जारी कर दिए थे। कांग्रेस को इसका कोई सियासी फायदा तो नहीं हुआ जनरल श्रेणी के कर्मचारी उससे जरूर नाराज हो गए। सामान्य वर्ग कर्मचारी कल्याण महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष राकेश भारद्वाज के नेतृत्व में कर्मचारियों ने कई जगहों पर कांग्रेस के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किए।










