आमी केयूर संगे कोथा बोलबो ना.
रविवार को 4 साल की सपना के साथ जो हादसा हुआ उससे वह अभी भी उबर नहीं पाई है। बालसुलभ मन पर भय अंकित हो गया है और वह उससे उबर नहीं पा रही है। उसकी नन्हीं जुबान सिर्फ इतना ही कहती है ‘आमी केयूर संगे कोथा बोलबो ना’ यानी मैं किसी से बात करना नहीं चाहती। यानी हादसा मन-मष्तिस्क से हृदय तक घर कर गया है।
कालड़ा अस्पताल के वार्ड नंबर 3 में सपना मल्लिक से जब यह संवाददाता मिलने पहुंचा तो वह टीवी पर एकटक काटरून देख रही थी । उस नन्हीं सी जान को यह मालूम ही नहीं कि उसका दाहिना हाथ शेर का शिकार हो गया। वह यही सोचती है कि हाथ में एक घाव हुआ है जो कुछ दिनों में ठिक हो जाएगा।










