Wednesday, Nov 18th, 2009, 4:09 am [IST]  

danik bhaskarवित्तीय मामलों की जानकारी देने से बच रही पीयू

अधीर रोहाल

चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी राइट टू इन्फॉर्मेशन (आरटीआई) में वित्तीय मामलों की जानकारी देने से बच रही है। पिछले लगभग छह महीनें में पीयू के वित्तीय खर्चो को लेकर मांगी गई जानकारी आधी अधूरी दी जा रही है।



परीक्षाआंे के संचालन से लेकर हॉस्टलों और दूसरे मद में मिली राशि देने से पीयू को परहेज है। इन मामलों में या तो पीयू आधी अधूरी जानकारी दे रही है या फिर जानकारी मांगने वाले के सामने मनमानी शर्ते रखकर जानकारी छुपाने की कोशिश हो रही है।



कभी सीआईसी को बार—बार आश्वासन देने के बाद जानकारी नहीं दी जा रही तो कहीं विद्यार्थी द्वारा मांगी गई जानकारी के एवज में 12 लाख रुपए शुल्क के मांगे जा रहे हैं। यहां तक कि एक मामले में तो पीयू ने जानकारी एकत्र करने वाले कर्मचारियों से लेकर फोटोस्टेट करने वाले मशीन ऑप्रेटर तक का भी वेतन मांग लिया।



कुछ न कुछ गड़बड़ है: नितिन



आरटीआई के तहत जानकारी मांगन ेवाले नितिन गोयल कहते हैं कि इस तरह की जानकारी न देने से बचने से साफ है कि कहीं न कहीं कुछ गडबड़ है जिसे प्रशासन छिपाना चाहता है। लेकिन अब सीआईसी के निर्देश आ चुका है। अब हम यह देखेंगे कि पीयू प्रशासन इन 48 आइटम पर अभी तक दाखिल हुई आरटीआई के जवाब देता है या नहीं क्योंेकि पीयू ने सीआईसी को भरोसा दिलाया है कि बाकी आवेदनों पर निशुल्क जानकारी देंगे। अगर ऐसा नहीं होता तो फिर सीआईसी में शिकायत की जाएगी।



हम जानकारी देने को तैयार हैं



पीयू के फाइनेंस ऑफिसर और पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर विक्रम नैयर का कहना है कि नितिन गोयल द्वारा जो 48 आइटम का मसला उठाया गया है, उसमें हम जानकारी देने को तैयार हैं। यह 48 आइटम सिर्फ अपने अधिकारियों की जानकारी के लिए हैंडबुक में डाली गई हैं। लेकिन इनसे संबंधित जानकारी छिपाने का हमारा कोई इरादा नही है। रही बात दूसरे वित्तीय मामलों से संबंधित जानकारी का तो हमारी मंशा कभी भी जानकारी को छिपाने की नहीं रही है।

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