मिडल के मिड-डे मील को अभी तक नहीं मिले बर्तन
करनाल. प्राइमरी स्कूलों के बाद मिडल स्कूलों में शुरू की गई मिड-डे मील योजना आधी-अधूरी बनी हुई है। योजना को लागू किए दो साल होने को हैं, लेकिन अभी तक मिडल स्कूलों को मिड-डे मील पकाने के लिए बर्तनों की दरकार बनी हुई है।
प्राइमरी कछाओं के बर्तनों से काम चलाया जा रहा है, लेकिन पुराने होने के कारण उनकी तली से खाना जलने लगा है। प्रदेश में वर्ष 2007 से मिडल स्कूलों में मिड-डे मील की योजना लागू की गई है। इस योजना को शुरू हुए लगभग दो साल का समय बीत गया है।
लेकिन अभी तक स्कूलों में बर्तनों की व्यवस्था नहीं हो पाई है। बर्तनों के अभाव में कई स्कूलों को प्राइमरी स्कूलों के साथ मिलकर खाना बनाना पड़ता है। इस स्थिति में कभी मील कम पड़ जाता है तो कभी ठीक से पक नहीं पाता। बर्तनों के चक्कर में कई बार भोजन नहीं पक पाता है।
रसोई का कोई बंदोबस्त नहीं
मिड-डे मील के लिए रसोई का बंदोबस्त अब तक नहीं हो पाया है। अध्यापकों और बच्चों को खुले में मील पकाने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
बर्तन डायरेक्टर ऑफिस को खरीदने होते हैं, जब ऊपर से बर्तन भेजें जाएंगे स्कूलों को दे दिए जाएंगे। - महिपाल कांबोज, एसओ, डीईईओ कार्यालय










