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Wednesday, Nov 18th, 2009, 4:46 am [IST]  

danik bhaskarशहर की हरियाली पर दीमक का हमला

रमेश पाल

करनाल. शहर की हरी भरी हरियाली को दीमक निगल रही है। शहर की सड़कों पर खड़े पेड़ दीमक की गिरफ्त हैं। कई पौधों को तो दीमक ने जड़ से शाखाओं तक खा लिया है तो कई सूखकर ठूंठ बन गए हैं। यह पेड़ किसी निर्जन स्थान पर नहीं बल्कि ऐसे स्थानों पर खड़े हैं, जहां से हर समय आदमी गुजरते रहते हैं।



पर्यावरण की रक्षा के लिए एक ओर जहां रैली और गोष्ठियां आयोजित की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर पेड़ों के प्रति वन विभाग और जनता कितना संजीदा है, इसकी पोल पेड़ों की दशा देखकर आप जान सकते हैं। शुरू-शुरू में तो पेड़ों पर लगी यह दीमक सामान्य सी लगती है, लेकिन टाइम बीतने के बाद जब पेड़ की छाल सूख जाती है तो धीरे-धीरे पेड़ भी सूखने लगता है।



एनजीओ भी बेखबर



रैली और गोष्ठियों से पर्यावरण के प्रति जागरुकता फैलाने वाले सामाजिक संगठन और एनजीओ भी पेड़ों की सुरक्षा को लेकर पीछे चल रहे हैं। पेड़ों को रोपित करने पर भले ही लोगों ने कदम बढ़ाए हैं, लेकिन पेड़ों की सुरक्षा के लिए वन विभाग के साथ-साथ जनता भी लापरवाह बनी हुई है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार दो वर्ष की आयु से ऊपर के वृक्षों को छाल पर लगी दीमक से नुकसान नहीं है। दो साल तक के पेड़ों में क्लोरोपाइरीफोस दवा डाली जाती है।



पुलिस लाइन एरिया में ठूंठ बना पेड़



पुलिस लाइन के पास खड़े पेड़ों को उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। यहां गेट पर खड़े डेक के पेड़ के तनों को दीमक ने बुरी तरह से खा लिया, जबकि दस कदम की दूरी पर फुटपाथ पर खड़े पेड़ को दीमक निगल गया है। ठूंठ रूप में खड़ा यह पेड़ दीमक के कहर को दर्शा रहा है, जबकि न तो वन विभाग और न शहर के जागरूक लोग पेड़ों पर लगी इस बीमारी पर गौर कर रहे हैं।



नीम का पेड़ भी दीमक का शिकार



शहर में विधायक निवास क्षेत्र में भी पेड़ों को दीमक चट करता जा रहा है। न्यायपुरी में प्रवेश करते समय दाईं तरफ तथा कुछ ही दूरी पर आगे बाईं ओर खड़ा नीम का पेड़ दीमक का शिकार है। इन सड़कों पर गिनी-चुनी संख्या में खड़े इन पेड़ों को दीमक निगल गया तो फिर हरियाली कहां से रह पाएगी। पर्यावरण जागरुकता को लेकर हमारे प्रयास तब तक अधूरे रहेंगे जब तक हम अपने आसपास खड़े पेड़ों की सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं होंगे।



पुरानी कचहरी में लगे पेड़ भी नहीं अछूते



31 मई स्टेडियम में वीआईपी पर्सनाल्टी द्वारा रोपित पेड़ भी दीमक की मार से नहीं बच पाए हैं। पुरानी कचहरी परिसर में खड़े पेड़ों पर दीमक बुरी तरह से लग गया है। माल रोड पर खड़े पेड़ों पर भी दीमक पांव पसार रही है। यह स्थान तो पेड़ों पर लगी दीमक आइना मात्र है, शहर में सैकड़ों पेड़ दीमक की चपेट में हैं। पुस्तकालय में आने वाले बुद्धिजीवी लोगों का ध्यान भी इन पेड़ों की तरफ नहीं गया। यहां नए पेड़ों पर ही दीमक का ग्रहण लगा है।

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