आधी जीत मुलजिम की और आधी पुलिस की
अमृतसर. गांव में स्थित खूह के अहाते में से डेढ़ मरला जमीन ने कुछ ऐसा रंग दिखाया है कि आरोपी सलाखों के पीछे जा पहुंचा है। इस मामले में पुलिस ने उसे आज इलाका मैजिस्ट्रेट (सीजेएम) करनैल सिंह की अदालत में पेश कर जब 5 दिनों का पुलिस रिमांड मांगा। बचाव पक्ष के वकील अजय कुमार विरमानी और नमित सिंह की दलीलें सुनने के बाद पुलिस के इस अनुरोध को ठुकरा दिया।
आरोपी को 1 दिसंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश जारी किए ही थे कि बचाव पक्ष ने उसकी तुरंत जमानत याचिका भी दायर कर दी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। गांव बल सिकंदर निवासी बिक्रमजीत सिंह ने गांव वासी हरिन्द्र सिंह पुत्र दिलबाग सिंह के खिलाफ थाना सिविल लाइन में 22 अक्तूबर, 2009 को भादंसं की धारा 417/420 के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया था।
आरोपी ने गांव में स्थित अहाता खूह खसरा नंबर 27/26 में से डेढ़ मरला जमीन 27 जून, 2007 को सेलडीड के जरिए बेची थी। इंतकाल करवाने पर पता चला कि आरोपी की सारी मालकी ही खत्म हो चुकी थी। वह अपने हिस्से की 9 कनाल 6 मरले जमीन 20 मार्च, 2007 को पहले ही बेच चुका था। इस जमीन के साथ उसने अहाता खूह से अपना डेढ़ मरले जमीन वाला हिस्सा भी बेच दिया था।
आरोपी ने अहाता खूह से डेढ़ मरला जमीन को दूसरी बार बेच कर उससे धोखाधड़ी की है। वकीलों का कहना था कि यह मामला दीवानी (सिविल) का बनता है, न कि फौजदारी। जबकि पुलिस का यह कहना था कि आरोपी से यह पूछा जाना है कि उसने किसके कहने पर यह डेढ़ मरला जमीन दूसरी बार 70 हजार रुपए में बेची थी। इसके लिए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ 5 दिनों का पुलिस रिमांड दिए जाने के लिए अदालत से अनुरोध किया था।










