..तो बिजली कर्मियों पर गिरेगी ‘बिजली’
बिलासपुर. बिजली चोरी रोकने के लिए अब आम उपभोक्ता ही नहीं, विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों के घरों में भी छापामार कार्रवाई शुरू हो गई है। चोरी मिली तो कर्मचारी के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया जाएगा और निलंबन की गाज गिरेगी। इतना ही नहीं, वे तीन साल के इंक्रीमेंट और बिजली पर मिलने वाली छूट से भी वंचित रहेंगे। वितरण कंपनी के इस सकरुलर से प्रदेशभर के विद्युत कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
बिजली उत्पादन के 30 फीसदी हिस्से की चोरी से परेशान विद्युत वितरण कंपनी चोरों पर शिकंजा कस रही है। ताज्जुब की बात है कि चोरी करने वालों में आम उपभोक्ता ही नहीं, विभागीय अधिकारी, कर्मचारी भी शामिल हैं। अब छापामार दल आम उपभोक्ताओं की तरह कर्मचारियों के घरों में भी दबिश देगा।
इसके लिए बकायदा राज्य स्तरीय टीम बनाई गई है। चोरी मिली तो अधिकारी भूल जाएंगे कि वह विभागीय कर्मचारी है या बड़ा अधिकारी। आम उपभोक्ता की तरह इनके खिलाफ भी चोरी के प्रकरण बनाए जाएंगे। मामला इतने में ही शांत नहीं होगा। इन पर वितरण कंपनी भी सख्त कार्रवाई करेगी।
जारी सकरुलर के मुताबिक बिजली चोरी करते पकड़े गए अधिकारी, कर्मचारी के खिलाफ विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत पुलिस में मामला दर्ज होगा और जेल जाने पर तत्काल निलंबित किए जाएंगे। ऐसे कर्मचारियों को 3 साल तक इंक्रीमेंट नहीं दिया जाएगा और बिजली पर मिलने वाली 50 फीसदी की छूट भी नहीं मिलेगी। विभाग की सख्ती से बिजली चोरी करने वाले विभागीय कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
क्या है धारा 135
मीटर बाईपास या फिर दूसरे तरीके से बिजली चोरी करने वाले के खिलाफ विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत कार्रवाई होती है। इस धारा के तहत 10 किलोवाट तक की बिजली चोरी पर 6 माह से 3 साल और 10 किलोवाट से ज्यादा पर आरोपी को 5 साल कैद की सजा हो सकती है। इसके अलावा जुर्माना भी देना होगा।










