वादा नहीं, लिखकर दो
सीकर. ट्रेफिक, उजड़े पार्को, कॉलोनियों में गंदगी के ढेर, पानी की कमी और भी बहुत कुछ। समस्याओं के अंबार से साल दर साल जूझ रही शहर की महिलाओं ने इस बार वादों के भरोसे में नहीं आने का फैसला किया है।
इसके लिए चुनाव को सुनहरा मौका मानते हुए वोट मांगने के लिए आने वाले प्रत्याशियों से वादे लिखित में लेंगी। मंगलवार को दैनिक भास्कर कार्यालय में टॉक-शो में शामिल हुई महिलाओं ने शहरी सरकार में महिलाओं की अच्छी तादाद आने पर खुशी जताते हुए कहा कि इस अभियान को शहर की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर चलाने की बात कही।
इस चर्चा में महिलाओं ने शहर के कई मुद्दों पर खुलकर बात की। उनका कहना है कि बड़ी समस्याओं को छोड़िए यदि किसी वार्ड में पशु मर जाए या फिर नाली कचरे से अट जाए तो कई बार सूचना करने पर नगरपरिषद से कर्मचारी पहुंचता है। कुछ ऐसी स्थितियां भी आती हैं कि खुद इलाके के लोगों को यह काम करना पड़ता है।
यातायात के यह हाल हैं कि शहर रेंग-रेंग कर चल रहा है। रोड लाइट, सीवरेज, ड्रेनेज और टाऊन प्लानिंग को लेकर केवल बातें होती रही हैं। फैसले भी ऐसे लिए गए कि वे आम जनता के लिए नासूर बन गए हैं। फतेहपुर बस स्टैंड को लीजिए, मारू स्कूल के पास शिफ्ट कर दिया गया है, जिससे स्कूल में पढ़ रही छात्राओं की परेशानी बढ़ गई है। वोट करने के मामले में स्थिति यह हो चुकी है एक तरफ और दूसरी तरफ कुआ है। आखिर किसे वोट दिया जाए।
महिलाओं ने बताया कि अब चुनाव आते ही प्रत्याशी वोट मांगने आ रहे हैं और बस कहते देते हैं वोट दो काम कराएंगे। महिलाओं ने एक स्वर में कहा चाहे चुनाव में पांच बचे हैं लेकिन, यह नहीं चलेगा। जो भी वोट मांगने आए उसे लिखकर हमारी मांग देंगे और फिर हस्ताक्षर कराएंगे। यह महज 20 महिलाएं नहीं शहर की तमाम महिलाओं से अपील की जाएगी कि वे ऐसा करें। ताकि चुनाव जीतने वाले प्रत्याशी से बाद में दो टूक बात की जाएगी।










