विशेष सम्मेलन का रहस्य बरकरार
रायगढ़. नगर पालिका से नगर पालिक निगम बनने और इसके पांच वषों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। नगरीय निकाय चुनाव दिसंबर-जनवरी में होना तय है। इस लिहाज से आज-कल में आचार संहिता लगने की प्रशासनिक हलकों में चर्चा है। इस बीच कुछ स्थानों में प्रशासनिक फेरबदल होने के भी संकेत हैं। इन सब के बीच रायगढ़ नगर निगम का विशेष सम्मेलन बुलाए जाने का मामला लटकता जा रहा है।
सोमवार को निगम के पार्षदों ने आयुक्त, सभापति व महापौर को एक ज्ञापन सौंपते हुए बीते 10 नवंबर को हुए विशेष सम्मेलन को नगर पालिक अधिनियम की धारा 30 के तहत अमान्य कर दुबारा सम्मेलन किए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को पार्षद जयंत ठेठवार व आशीष ताम्रकार ने महापौर जेठूराम मनहर को विशेष बैठक बुलाए जाने को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने एक पत्र दिया है।
पत्र में पाषर्दों ने आचार संहिता का हवाला देते हुए कहा है कि बैठक का विषय काफी गंभीर होने की वजह से आयुक्त ने अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए जल्द सम्मेलन बुलाने का पत्र सभापति को जारी किया है। पाषर्दद्वय ने महापौर से आग्रहपूर्ण शब्दों में कहा है कि नगर निगम के सर्वोच्च पद पर निर्वाचित जनप्रतिनिधि होने के नाते 26 पार्षदों की मंशा व 4 एमआईसी सदस्यों के आवेदन पर ध्यान देते हुए बैठक के संदर्भ में आए विवादित विषयों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
वर्तमान विषय में 26 पार्षदों का परिषद पर यह स्पष्ट आरोप है कि विशेष सम्मेलन के लायक विषय नहीं होने की वजह से सर्वसम्मति से ‘आगामी’ दिनों के लिए टाल दी गई, जिसकी सूचना भी अधिकांश पाषर्दों को नहीं दी गई। आरोप बेहद गंभीर होने के साथ यह भ्रष्टाचार व विधि विरूद्ध इंगित होने से उस बैठक में महापौर की उपस्थिति व चुप्पी को पाषर्दों ने उनकी संलिप्तता बताते हुए इसे परिषद की गरिमा के लिए स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक बताया है।
परिषद में पास किए जाने वाले प्रस्तावों मंे से कुछ प्रस्ताव पर 26 पाषर्दों ने सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता पूर्ण होने व व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने वाला प्रस्ताव बताया है। विदित हो कि सोमवार को पाषर्दों ने अपने सात सूत्रीय ज्ञापन में कई गंभीर आरोप लगा कर कई मामले में आर्थिक लाभ लेने का अंदेशा जाहिर करते हुए विशेष सम्मेलन दुबारा बुलाए जाने की मांग किया है। जिसमें प्रमुख रुप से निगम के तकनीकी अधिकारी डीके शर्मा द्वारा अपने एक ठेकेदार मित्र को लाभ पहुंंचाने बिना स्वीकृति करोड़ों रुपए की पोल खरीदी व पार्षदों की मांग के अनुरुप जन हित कार्यों की अनदेखी सहित आयुक्त द्वारा बोलेरो खरीदी का मामला प्रमुखता से उठाया गया है।










