भाजपा की गाइड लाइन से आधे दावेदार बाहर
जबलपुर. भारतीय जनता पार्टी की प्रबंध समिति की बैठक में भाजपा पार्षद प्रत्याशी के लिए जो गाइड लाइन बनी है, उससे शहर के विभिन्न वार्डो में भगदड़ की स्थिति बन गई है। जहां दस दावेदार थे वहां पर सिर्फ दो दावेदार बचे हैं। अब वे इस सोच में हैं कि आखिर क्या किया जाए।
भाजपा ने तय किया है कि जो जिस वार्ड का मतदाता है वहीं से वह भाजपा का प्रत्याशी बन सकता है और अनारक्षित वार्ड से सिर्फ अनारक्षित वर्ग का व्यक्ति ही चुनाव लड़ सकता है। इन वार्डो में आरक्षित वर्गो के लोग प्रत्याशी नहीं बन सकते। इसी तरह अगर अभी जहां महिला पार्षद है और वह वार्ड पुरुष का हो गया है तो महिला
पार्षद का पति दावेदारी नहीं कर सकता। इन तीन बिन्दुओं के कारण भाजपा मंे जो दावेदारी प्रत्याशियों द्वारा पेश की गई थी, वह आधे से भी कम बची है। इसको लेकर भाजपा खेमे में हलचल व्याप्त है और कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐन मौके पर इस तरह के नियम लादना ठीक नहीं हैं।
अगर उनका वार्ड बदल गया है तो इसमें उनका क्या दोष है। सक्रिय कार्यकर्ताओं को पार्टी नजरअंदाज कर रही है और मनमर्जी लादने के लिए पार्टी के नेताओं ने यह नियम सिर्फ जबलपुर के लिए तय किये हैं।
औपचारिकता शेष
सूत्रों का यह भी कहना है कि टिकिटें लगभग फाइनल हो चुकी हैं अब सिर्फ औपचारिकताएं शेष हैं। बायोडाटा देने वालों ने भी दरबार में अपनी अर्जी लगाई है। कई दावेदारों ने नगर संगठन को भी पार्षदी का दावा पेश नहीं किया है। उनका कहना है कि संगठन का कोई औचित्य नहीं है। जिसको टिकिट मिलना है उनको टिकिट मिलकर रहेगी
उम्र बीत गई दरी बिछाने में
कुछ कार्यकर्ता ऐसे हैं जिनकी जिन्दगी दरी बिछाने में निकल गई और अब पार्षदी की दावेदारी पेश की है। यह दावेदारी उन्होंने बच्चों के कहने पर पेश की है। उन्हें पूरा भरोसा है कि उन्हें टिकिट नहीं मिलेगी, लेकिन बच्चों के खातिर इतना करना तो जरूरी था ताकि उनकी संगठन के प्रति जिम्मेदारी का पता चल सके।
नियम का पालन होगा
भाजपा की प्रबंध समिति ने जो तीन बिन्दु तय किए हैं उस पर अमल करने के निर्देश सभी पर्यवेक्षकों को दिए गए हैं। इन निर्देशों के कारण कई दावेदार टिकिट की दौड़ से बाहर हो गए हैं।
अनिल शर्मा, भाजपा नगर अध्यक्ष










