न्यास सचिव के फर्जी हस्ताक्षरों से 25 सिम जारी कराईं
अलवर. राष्ट्रीय राजधानी परियोजना क्षेत्र निदेशक एवं नगर विकास न्यास सचिव के फर्जी हस्ताक्षर व जाली मोहर से शहर में एक निजी मोबाइल कंपनी से 25 सिम कार्ड जारी कराने का मामला सामने आया है। घटना का पता लगने के बाद नगर विकास न्यास के अधिकारियों में खलबली मच गई। न्यास सचिव ने मंगलवार को ही इसकी शिकायत शहर कोतवाली थाने को भेजी है।
राष्ट्रीय राजधानी परियोजना क्षेत्र निदेशक यूआईटी सचिव होते हैं। नगर विकास न्यास की ओर से शहर कोतवाली को भेजी गई शिकायत में कहा गया है कि न्यास कार्यालय के लिए पोस्टपेड सीयूजी प्लान में 28 अक्टूबर 2009 को अज्ञात लोगों ने रोड नंबर दो स्थित एक निजी मोबाइल कंपनी से 25 सिम कार्ड जारी करा लिए। सिम लेने वालों ने मोबाइल कंपनी को पत्र लिखकर सिम कार्ड यूआईटी कार्यालय में उपयोग के लिए जारी करने के लिए लिखा।
प्रार्थना पत्र पर यूआईटी निदेशक के दो जगह फर्जी हस्ताक्षर कर सील लगाई गई। इसके अतिरिक्त प्लान इनरोलमेंट फॉर्म तथा फॉर्म नंबर 60 पर भी निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर कर लिए गए। पत्र में यह भी लिख दिया गया कि बिल का भुगतान यूआईटी की ओर से किया जाएगा।
मोबाइल कंपनी ने कागजातों के आधार पर 9001993251 से 900993275 नम्बर तक सिम कार्ड जारी कर दिए। नगर विकास न्यास सचिव जीडी आर्य ने शहर कोतवाली पुलिस को फर्जी कागजातों से सिम जारी कराने वालों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई करने के लिए लिखा है।
कैसे हुआ खुलासा :
सीयूजी में लिए प्लान में कॉल की लिमिट 1200 रुपए थी। सिम लेने वालों में से एक का बिल 1200 रुपए से ज्यादा आ गया। इस पर कंपनी ने बिल का भुगतान करने के लिए नगर विकास न्यास को पत्र लिख दिया। यूआईटी के अधिकारियों को जब पता लगा कि इस नम्बर की सिम तो किसी कर्मचारी को जारी नहीं की गई तो उन्होंने मोबाइल कंपनी से संपर्क किया। यूआईटी अधिकारियों को पता लगा कि इस प्लान के तहत 24 अन्य सिम जारी की हुई हैं। इस पर न्यास अधिकारियों में खलबली मच गई।
नगर विकास न्यास की ओर से सचिव व निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर एवं मोहर से सिम कार्ड जारी कराने की शिकायत आई है। बुधवार को इस पर कार्रवाई की जाएगी। - जगमोहन शर्मा, शहर कोतवाल










